भोपाल। शिवाजी नगर स्थित सिद्धांता सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की जांच में अस्पताल में 19 गंभीर कमियां और नियमों का उल्लंघन मिलने के बाद पंजीयन और संचालन लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। आदेश 31 अगस्त 2026 को जारी हुआ। जांच में इमरजेंसी, ICU, डायलिसिस, OPD, एक्स-रे, PET-CT, पैथोलॉजी और फायर सेफ्टी सहित कई व्यवस्थाओं में खामियां सामने आई हैं।
लाइसेंस निरस्त होने के बाद अस्पताल अपने मौजूदा पंजीयन के आधार पर नए मरीज भर्ती नहीं कर सकेगा और चिकित्सा एवं नर्सिंग सेवाओं का संचालन भी नहीं कर सकेगा। हालांकि, पहले से भर्ती मरीजों के इलाज और सुरक्षा की जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की रहेगी। किसी गंभीर मरीज को ऐसी स्थिति में अचानक डिस्चार्ज या दूसरे अस्पताल में शिफ्ट नहीं किया जा सकेगा, जिससे उसके स्वास्थ्य या जीवन पर प्रतिकूल असर पड़े।
इमरजेंसी में सिर्फ एक BP मशीन और ऑक्सीजन सिलेंडर
स्वास्थ्य विभाग की निरीक्षण टीम को इमरजेंसी में मरीजों की तत्काल जांच के लिए पर्याप्त उपकरण नहीं मिले। यहां केवल एक BP मशीन और एक ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध था। सबसे गंभीर आपत्ति इमरजेंसी की क्रैश कार्ट को लेकर सामने आई, जो निरीक्षण के दौरान लॉक मिली।
ट्रॉमा एरिया में इंजेक्शन लगाने के लिए बेड होने और उसी जगह ड्रेसिंग किए जाने का भी रिपोर्ट में उल्लेख है। गंभीर मरीज की स्थिति बिगड़ने पर तत्काल जीवनरक्षक उपकरण और दवाएं उपलब्ध होना जरूरी माना जाता है।
डायलिसिस यूनिट में संक्रमण नियंत्रण पर सवाल
अस्पताल की चार बेड वाली डायलिसिस यूनिट में निरीक्षण के समय केवल दो डायलिसिस टेक्नीशियन मिले। मरीजों की सीरोलॉजी रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी और सीरो-पॉजिटिव मरीजों के लिए अलग व्यवस्था भी नहीं मिली।
एक टेक्नीशियन की निर्धारित योग्यता से संबंधित प्रमाण-पत्र भी निरीक्षण दल के सामने प्रस्तुत नहीं किया गया। HBV, HIV और HCV जैसे संक्रमणों से बचाव के लिए निर्धारित संक्रमण नियंत्रण व्यवस्थाओं में भी कमियां दर्ज की गईं।
ICU में संक्रमित मरीजों के लिए बने केबिन में मिले सामान्य मरीज
ICU में संक्रमित मरीजों के लिए बनाए गए दो अलग केबिन में असंक्रमित मरीज भर्ती मिले। जांच टीम ने इसे संक्रमण नियंत्रण की दृष्टि से जोखिमपूर्ण माना। ICU में ड्यूटी कर रहे एक डॉक्टर की योग्यता और उसके MOU से जुड़े दस्तावेज भी निरीक्षण के दौरान प्रस्तुत नहीं किए गए। रिपोर्ट में ICU की ऑक्सीजन व्यवस्था और मरीजों से संबंधित दस्तावेजी प्रक्रियाओं को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
OPD में निर्धारित समय पर डॉक्टर नहीं मिले
निरीक्षण के दौरान OPD में डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर भी अनियमितताएं मिलीं। अस्पताल के सूचना पट्ट पर चिकित्सकों के समय और सेवाओं की जानकारी प्रदर्शित थी, लेकिन कई OPD कक्षों में निर्धारित समय पर डॉक्टर मौजूद नहीं मिले। OPD कक्ष-1 में डॉ. राहुल पेशवानी मौजूद थे, लेकिन सूचना पट्ट पर उनके नाम के सामने निर्धारित समय और विशेषज्ञता की जानकारी दर्ज नहीं थी।
एक्स-रे में लेड एप्रन और थायरॉयड कॉलर नहीं
एक्स-रे, सोनोग्राफी और CT स्कैन क्षेत्र में भी कई कमियां सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार मोबाइल एक्स-रे यूनिट का अनधिकृत इस्तेमाल किया जा रहा था। मरीजों को एक्स-रे के दौरान लेड एप्रन और थायरॉयड कॉलर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे थे। मरीज को एक्स-रे के दौरान कमरे में ही बैठाए जाने और जांच से संबंधित जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात भी निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज है।
TMT के दौरान आपात स्थिति के लिए डिफिब्रिलेटर नहीं
TMT यानी ट्रेडमिल टेस्ट की व्यवस्था की जांच में आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी डिफिब्रिलेटर उपलब्ध नहीं मिला। पुराने TMT मरीजों के अनुमति पत्रों में आवश्यक चिकित्सकीय मापदंडों का उल्लेख नहीं होने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। PET-CT क्षेत्र में स्कैन रूम और कंट्रोल रूम के बीच विभाजन तथा PET स्कैन रूम के इस्तेमाल को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गईं। रेडियो-हाजार्ड क्षेत्र से जुड़ी निर्धारित व्यवस्थाओं के पालन पर भी सवाल उठाए गए।
पैथोलॉजी में रिकॉर्ड और थर्मामीटर की रीडिंग अलग
पैथोलॉजी विभाग में डीप फ्रीजर के तापमान रिकॉर्ड में 4.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज था, जबकि डिजिटल थर्मामीटर पर तापमान 2.3 डिग्री सेल्सियस मिला। निरीक्षण के समय पैथोलॉजिस्ट भी उपलब्ध नहीं थे। एंडोस्कोपी रूम और HIV से जुड़े मानकों के पालन में भी कमियां रिपोर्ट की गईं।
अस्पताल में सिर्फ एक मुख्य प्रवेश-निकास द्वार
फायर सेफ्टी को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग ने गंभीर आपत्ति जताई। निरीक्षण टीम को मरीजों और कर्मचारियों के आने-जाने के लिए केवल एक मुख्य प्रवेश-निकास द्वार मिला। आपात स्थिति में इस्तेमाल होने वाला वैकल्पिक निकास या सीढ़ियों की व्यवस्था नहीं मिली। 20 अप्रैल 2026 को हुए फायर ऑडिट में दिए गए सुझावों के अनुपालन से संबंधित दस्तावेज भी निरीक्षण टीम के सामने प्रस्तुत नहीं किए गए।
18 जून को नोटिस, 7 जुलाई को बनी निरीक्षण टीम
CMHO की कार्रवाई से पहले अस्पताल प्रबंधन को 18 जून 2026 को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। जवाब की समीक्षा के बाद 7 जुलाई 2026 को संशोधित आदेश जारी कर निरीक्षण दल गठित किया गया।
सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जय प्रकाश चिकित्सालय भोपाल की अध्यक्षता में गठित टीम ने अस्पताल का भौतिक निरीक्षण किया। टीम को पंजीयन और अनुज्ञप्ति की शर्तों तथा निर्धारित स्वास्थ्य मानकों का पर्याप्त और सतत पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई।
1973 के नियमों के तहत निरस्त हुआ पंजीयन
जांच में मिली कमियों के आधार पर मध्यप्रदेश उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण एवं अनुज्ञापन) नियम, 1973 के तहत अस्पताल का पंजीयन और अनुज्ञप्ति निरस्त करने का निर्णय लिया गया। अब अस्पताल निरस्त पंजीयन के आधार पर नए मरीजों को भर्ती नहीं कर सकता और चिकित्सा-नर्सिंग सेवाएं संचालित नहीं कर सकता। पहले से भर्ती मरीजों का इलाज जारी रखने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की रहेगी।
2029 तक का समझौता होने का अस्पताल का दावा
सिद्धांता अस्पताल का मामला पहले हाईकोर्ट भी पहुंच चुका है। अस्पताल प्रबंधन का कहना था कि वह वर्ष 2015 में हुए एक समझौते के आधार पर अस्पताल संचालित कर रहा है और यह समझौता 4 जुलाई 2029 तक प्रभावी है।
संचालन रोके जाने की आशंका को लेकर प्रबंधन ने हाईकोर्ट का रुख किया था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि अस्पताल के खिलाफ जबरन कार्रवाई नहीं की गई है और शिकायतों की जांच चल रही है। जांच के निष्कर्ष के आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले का निपटारा कर दिया था। अब CMHO की जांच में सामने आई 19 कमियों के आधार पर अस्पताल का पंजीयन और लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की गई है।
