मंत्री प्रहलाद पटेल ने सोशल मीडिया के जरिए 19 मृतकों की सूची सार्वजनिक की। इसके साथ ही उन्होंने प्रभावित परिवारों को सरकारी योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता देने की बात कही। मंत्री के मुताबिक संबल योजना में पंजीकृत श्रमिकों के परिवारों को पात्रता के अनुसार 4 लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी। वहीं ऐसे परिवार जो इस योजना के दायरे में नहीं आते हैं उन्हें मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान और सहायता कोष के माध्यम से आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की बात कही गई है। सरकार की ओर से यह कदम मृतकों के परिवारों को तत्काल राहत देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार और जिला प्रशासन के आंकड़ों पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। पटवारी का कहना है कि बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब की वजह से मरने वालों की संख्या 50 से ज्यादा है और सरकार को वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने प्रशासन की ओर से अलग अलग समय पर बताए गए आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठाया। पटवारी के मुताबिक सागर जिला प्रशासन कभी 13 तो कभी 15 मौतों की जानकारी देता रहा जबकि अब सरकार के वरिष्ठ मंत्री खुद 19 मृतकों के नाम सार्वजनिक कर रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर वास्तविक संख्या कितनी है।
पटवारी सोमवार को प्रभावित गांवों के दौरे पर भी पहुंचे थे। उन्होंने मृतकों के परिवारों से मुलाकात कर हालात का जायजा लिया और सरकार से पीड़ितों की मदद बढ़ाने की मांग की। पटवारी ने मृतकों में बड़ी संख्या लोधी समाज के लोगों की होने का हवाला देते हुए मंत्री प्रहलाद पटेल से भी प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर उनकी सहायता करने की अपील की थी। इसके बाद मंत्री की ओर से मृतकों के नामों की सूची जारी की गई।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मुद्दा अब मौतों की सही संख्या को लेकर बन गया है। एक तरफ सरकार की ओर से 19 मृतकों के नाम सार्वजनिक किए जा चुके हैं तो दूसरी तरफ विपक्ष 50 से ज्यादा मौतों का दावा कर रहा है। ऐसे में आम लोगों और प्रभावित परिवारों के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि सरकारी रिकॉर्ड में कितनी मौतें दर्ज हैं और वास्तविक रूप से कितने परिवार इस त्रासदी से प्रभावित हुए हैं।
जहरीली शराब कांड के बाद प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। शराब की बिक्री और उसकी गुणवत्ता की निगरानी से लेकर समय पर कार्रवाई और पीड़ितों की पहचान तक कई स्तरों पर जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है। विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और मौतों के आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं।
फिलहाल मंत्री प्रहलाद पटेल द्वारा जारी 19 मृतकों की सूची और जीतू पटवारी के 50 से ज्यादा मौतों के दावे ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने की नहीं बल्कि मौतों की वास्तविक संख्या स्पष्ट करने की भी है। जब तक आधिकारिक आंकड़ा पूरी तरह सामने नहीं आता तब तक बंडा जहरीली शराब कांड को लेकर उठ रहे सवाल और राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप जारी रहने की संभावना है।
