सरकार के अनुसार भारतीय कपड़ा और परिधान उत्पादों के प्रमुख निर्यात बाजारों में अमेरिका, बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और जर्मनी शामिल रहे। इन देशों में भारतीय उत्पादों की मांग लगातार बनी रही, जिससे निर्यात को गति मिली। इसके अलावा वर्ष 2025-26 के दौरान 2024-25 की तुलना में 100 से अधिक देशों को होने वाले निर्यात में भी वृद्धि दर्ज की गई, जो भारतीय उद्योग के लिए नए अवसरों का संकेत माना जा रहा है।
केंद्र सरकार ने कहा कि टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र के निर्यात की नियमित निगरानी की जा रही है। सरकार उद्योग जगत, निर्यातकों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर ऐसी रणनीतियों पर काम कर रही है, जिनसे वैश्विक चुनौतियों का प्रभाव कम किया जा सके और भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को और मजबूत बनाया जा सके। इसका उद्देश्य उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय वस्त्र उद्योग की हिस्सेदारी को विस्तार देना है।
सरकार ने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गई हैं। इनमें पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल पार्क योजना, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजना, राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन, समर्थ योजना, सिल्क समग्र-2, राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम, राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम और अन्य निर्यात प्रोत्साहन योजनाएं शामिल हैं। इन पहलों का सकारात्मक प्रभाव उत्पादन, निवेश और निर्यात वृद्धि के रूप में सामने आया है।
निर्यात बढ़ाने के लिए सरकार ने 40 प्राथमिकता वाले देशों को ध्यान में रखते हुए बाजार विविधीकरण की रणनीति भी अपनाई है। साथ ही भारत के विभिन्न मुक्त व्यापार समझौते भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार का मानना है कि ब्रिटेन के साथ व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते के अलावा यूरोपीय संघ और न्यूजीलैंड के साथ होने वाले मुक्त व्यापार समझौते भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के लिए नए निर्यात अवसर पैदा करेंगे और वैश्विक बाजारों तक पहुंच को और आसान बनाएंगे।
सरकार ने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री परिवहन से जुड़ी चुनौतियों का असर कम करने के लिए विशेष राहत पहल शुरू की गई है, ताकि निर्यातकों को किसी प्रकार की अतिरिक्त कठिनाई का सामना न करना पड़े। इसके अलावा घरेलू उद्योग को पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 1 जून से 31 अक्टूबर 2026 तक कपास के आयात पर सीमा शुल्क अस्थायी रूप से माफ किया गया है। इससे उत्पादन लागत को नियंत्रित रखने और निर्यात क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
आगे की रणनीति के तहत सरकार ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए ‘मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी’ को भी मंजूरी दी है। इस मिशन का उद्देश्य कपास उत्पादन से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों को दूर करना, उत्पादकता बढ़ाना और गुणवत्ता में सुधार लाना है। सरकार का मानना है कि बेहतर गुणवत्ता वाला कच्चा माल उपलब्ध होने से भारतीय टेक्सटाइल उद्योग वैश्विक बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा तथा आने वाले वर्षों में निर्यात में नई ऊंचाइयों को हासिल करने में सफल रहेगा।
