ऑल PM पैकेज एम्प्लॉईज फोरम के अध्यक्ष सनी रैना ने चिट्ठी के माध्यम से कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों और उनके परिवारों की चिंताओं को सामने रखा है। उनका कहना है कि भले ही ऊपर से हालात सामान्य दिखाई देते हों, लेकिन जमीन पर डर और तनाव का माहौल बना हुआ है। कई परिवार अपनी सुरक्षा के साथ-साथ बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं।
कर्मचारियों ने कहा है कि हाल के दिनों में सामने आई हर धमकी उन्हें 1990 के दशक की घटनाओं की याद दिलाती है। उस दौर में धमकी भरे पत्र और नोटिस डर का माहौल बनाने के शुरुआती संकेत बने थे। इसके बाद बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़नी पड़ी थी। अब दोबारा धमकी भरे पत्र सामने आने से कर्मचारियों के बीच पुराने भय की स्थिति बन रही है।
पिछले कुछ हफ्तों के दौरान PM पैकेज के तहत घाटी में तैनात कर्मचारियों को लगातार धमकियां मिलने की बात सामने आई है। कई पत्रों में उन्हें सरकारी नौकरी छोड़ने की चेतावनी दी गई है और ऐसा नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। इन मामलों में यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) नाम के संगठन का उल्लेख सामने आया है।
कर्मचारियों की चिंता उस समय और बढ़ गई, जब उनका निजी डेटा ऑनलाइन लीक होने की बात सामने आई। सोशल मीडिया पर कुछ कर्मचारियों के फोन नंबर, घर के पते और वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर तक साझा किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे घाटी में रह रहे कर्मचारियों और उनके परिवारों में सुरक्षा को लेकर डर बढ़ गया है।
कर्मचारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोग अभी भी किराए के कमरों में रहने को मजबूर हैं। वहीं, जहां ट्रांजिट कॉलोनियां बनाई गई हैं, वहां भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों ने आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और उसे मजबूत करने की मांग की है।
अमित शाह को लिखी चिट्ठी में धमकियों की गंभीरता से जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। कर्मचारियों ने PM पैकेज के तहत काम कर रहे लोगों, उनके परिवारों और आवासीय कॉलोनियों की सुरक्षा बढ़ाने की अपील की है। साथ ही ऐसा प्रभावी सिस्टम बनाने की मांग की गई है, जिसके जरिए किसी कर्मचारी को धमकी मिलने पर वह तुरंत शिकायत दर्ज करा सके और समय पर सुरक्षा सहायता मिल सके।
कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि वे कश्मीर घाटी छोड़ना नहीं चाहते। उनका कहना है कि पिछले 15 वर्षों में उन्होंने उस जीवन को फिर से खड़ा करने की कोशिश की है, जो कई दशक पहले उजड़ गया था। वर्ष 2022 में राहुल भट की हत्या के बाद भी घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। अब नई धमकियों ने एक बार फिर उनकी सुरक्षा की चिंता बढ़ा दी है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें नौकरी और सुरक्षा में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर न किया जाए। वे कश्मीर में रहकर काम करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सुरक्षित माहौल चाहते हैं।
