इस परियोजना के तहत मौजूदा 1×25 केवी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को आधुनिक 2×25 केवी ट्रैक्शन सिस्टम में परिवर्तित किया जाएगा। यह अपग्रेडेशन लगभग 164 ट्रैक किलोमीटर के दायरे में किया जाएगा। इसके साथ ही बढ़ते विद्युत भार को ध्यान में रखते हुए पावर सप्लाई से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी आधुनिक तकनीक के अनुरूप विकसित किया जाएगा, जिससे भविष्य की बढ़ती परिचालन आवश्यकताओं को आसानी से पूरा किया जा सके।
परभणी-मुदखेड़ रेलखंड दक्षिण मध्य रेलवे के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। यह रणनीतिक रूप से हाईली यूटिलाइज्ड नेटवर्क (एचयूएन) रूट-9 का हिस्सा है, जो अजमेर, इंदौर, खंडवा, अकोला, पूर्णा, मुदखेड़, सिकंदराबाद, महबूबनगर और धोन जैसे प्रमुख शहरों और रेल मार्गों को जोड़ता है। इस कॉरिडोर का उपयोग बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनों के साथ-साथ मालगाड़ियों के संचालन के लिए भी किया जाता है, इसलिए इसकी क्षमता बढ़ाना रेलवे की प्राथमिकताओं में शामिल है।
रेल मंत्रालय का मानना है कि नए ट्रैक्शन सिस्टम के लागू होने से ट्रेनों को अधिक स्थिर और मजबूत विद्युत आपूर्ति मिलेगी। इससे इस रेलखंड पर माल ढुलाई की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और तेज गति से चलने वाली ट्रेनों, विशेषकर वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी आधुनिक ट्रेनों के संचालन को भी बेहतर तकनीकी समर्थन प्राप्त होगा। इसके परिणामस्वरूप ट्रेनों की समयबद्धता, परिचालन दक्षता और ऊर्जा उपयोग में भी सुधार आने की संभावना है।
यह परियोजना भारतीय रेलवे के दीर्घकालिक विकास कार्यक्रम का हिस्सा है। रेलवे का लक्ष्य वर्ष 2029-30 तक देशभर में 3,000 मिलियन टन माल ढुलाई का है। मंत्रालय का मानना है कि ट्रैक्शन प्रणाली के आधुनिकीकरण और विद्युत क्षमता में वृद्धि से इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। साथ ही व्यस्त रेल मार्गों पर बढ़ते ट्रैफिक को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करना भी संभव होगा।
भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों में विद्युत बुनियादी ढांचे के विस्तार और आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसी क्रम में देश के विभिन्न महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को उन्नत बनाने का कार्य तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे डीजल पर निर्भरता कम होने के साथ-साथ ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
हाल ही में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, भारत आज दुनिया के सबसे बड़े विद्युतीकृत रेलवे नेटवर्क वाले देशों में शामिल हो चुका है। देश के ब्रॉड गेज रेल नेटवर्क का लगभग 99.6 प्रतिशत हिस्सा विद्युतीकृत हो चुका है। इस मामले में भारत केवल स्विट्जरलैंड से पीछे है, जबकि नेटवर्क के आकार के लिहाज से भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में शामिल है।
रेलवे के अनुसार, वर्ष 2014 से 2026 के बीच मिशन मोड में 48,072 रूट किलोमीटर रेल मार्ग का विद्युतीकरण किया गया, जो पिछले कई दशकों की तुलना में कहीं अधिक तेज गति से पूरा हुआ है। नांदेड़ डिवीजन की यह नई परियोजना भी इसी व्यापक आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है, जिससे भविष्य में भारतीय रेलवे की क्षमता, विश्वसनीयता और परिचालन दक्षता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
