नई दिल्ली । परीक्षा प्रणालियों में सुधार की मांगों के बाद अब युवाओं ने देश की मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया मंचों पर एक नया व्यापक अभियान छेड़ दिया है। डिजिटल माध्यमों से शुरू हुई इस पहल को महज दो दिनों के भीतर लाखों की संख्या में युवाओं का समर्थन मिला है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बने विशेष पेज ने बहुत ही कम समय में रिकॉर्ड फॉलोअर्स जुटाकर इस विषय को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है। इस डिजिटल गोलबंदी को केवल ऑनलाइन तक सीमित न रखते हुए आयोजकों ने अब इसे राजधानी के जंतर-मंतर पर प्रत्यक्ष प्रदर्शन में बदलने की तैयारी शुरू कर दी है।
इस पूरे अभियान का मुख्य उद्देश्य मौजूदा जातिगत आरक्षण प्रणाली के स्थान पर पूर्णतः योग्यता और आर्थिक स्थिति पर आधारित चयन प्रक्रिया को लागू कराना है। अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों का तर्क है कि प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों में निष्पक्ष अवसरों के लिए पारदर्शी नीतियां आवश्यक हैं। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए एक समर्पित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वेबसाइट तैयार की गई है, जिसके माध्यम से युवाओं को संगठित किया जा रहा है। अलग-अलग राज्यों से जुड़ रहे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र इस मंच पर खुलकर अपनी प्रतिक्रियाएं और अनुभव साझा कर रहे हैं।
दूसरी ओर, इस ऑनलाइन पहल के सामने आते ही सोशल मीडिया पर नीति के पक्षधर समूहों की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं दर्ज की जा रही हैं। आरक्षण व्यवस्था का समर्थन करने वाले वर्गों का कहना है कि जब तक समाज से सामाजिक विषमताएं पूरी तरह समाप्त नहीं हो जातीं, तब तक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए यह संवैधानिक ढांचा अनिवार्य है। इसके जवाब में कई नए पेज और ऑनलाइन समूह भी सक्रिय हो गए हैं जो मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के सामाजिक महत्व को रेखांकित कर रहे हैं। इस प्रकार डिजिटल स्पेस में दोनों पक्षों के बीच विचारों का तीखा आदान-प्रदान देखने को मिल रहा है।
युवाओं के इस तेजी से बढ़ते रुख को देखते हुए सामाजिक और नीतिगत विश्लेषक इसे नए दौर का डिजिटल जनआंदोलन मान रहे हैं। अभियान के आयोजक अब इस ऑनलाइन समर्थन को एक संगठित ढांचा देने के लिए ऑनलाइन सदस्यता और देशव्यापी नेटवर्किंग पर बल दे रहे हैं। आने वाले समय में यदि यह अभियान दिल्ली की सड़कों तक पहुंचता है, तो यह प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों के लिए एक नई चुनौती पेश कर सकता है। फिलहाल, डिजिटल मंचों पर यह विषय शीर्ष रुझानों में बना हुआ है और युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।
