ट्विशा शर्मा की 12 मई 2026 की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। घटना के बाद ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया जबकि मायके पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया। मामले ने तूल पकड़ने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जांच की निगरानी करते हुए दिल्ली एम्स से दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने के निर्देश दिए थे।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद 25 मई 2026 को सीबीआई ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली। इसके बाद एजेंसी लगातार वैज्ञानिक साक्ष्यों डिजिटल रिकॉर्ड घटनास्थल की जांच और फॉरेंसिक विश्लेषण के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है। जांच के दौरान सीबीआई ने घटनास्थल का सीन रिक्रिएशन भी कराया और कई तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए।
सूत्रों के अनुसार दिल्ली एम्स के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने 10 जुलाई को अपनी 11 पृष्ठों की अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सीबीआई को सौंप दी थी। रिपोर्ट की एक प्रति मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी भेजी गई है। हालांकि रिपोर्ट की आधिकारिक सामग्री सार्वजनिक नहीं की गई है लेकिन बताया जा रहा है कि जांच में कथित तौर पर फांसी में इस्तेमाल हुई जिम बेल्ट पर मिले स्किन टिश्यू और ट्विशा की गर्दन पर मिले लिगेचर मार्क के बीच वैज्ञानिक समानता का उल्लेख किया गया है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल अदालत में रिपोर्ट पेश होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
आज की सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सीबीआई के पास जांच पूरी कर चालान पेश करने की वैधानिक समय सीमा तेजी से पूरी होने की ओर है। कानून के अनुसार एजेंसी को निर्धारित अवधि के भीतर आरोप पत्र दाखिल करना होगा। यदि तय समय में चालान पेश नहीं किया जाता है तो आरोपी पक्ष को डिफॉल्ट जमानत का दावा करने का कानूनी अधिकार मिल सकता है।
ऐसे में अदालत की आज की कार्यवाही इस हाई प्रोफाइल मामले की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है। यदि सीबीआई फॉरेंसिक रिपोर्ट के साथ चालान भी पेश करती है तो जांच अगले चरण में पहुंच जाएगी और मामले की सुनवाई तेजी से आगे बढ़ सकती है। पूरे प्रदेश की नजर अब अदालत की कार्यवाही और सीबीआई की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
