उन्होंने कहा कि इंदौर की अर्थव्यवस्था में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन प्रदेश में पढ़े-लिखे युवा रोजगार, भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक और वेतन से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उनका कहना था कि परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी का सीधा असर मेहनत करने वाले विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है।
चौधरी ने पेपर लीक के मामलों में जवाबदेही तय करने के लिए बोर्ड बनाने और प्रभावित अभ्यर्थियों को मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि युवाओं को बार-बार परीक्षा शुल्क भरकर परीक्षाओं की तैयारी करनी पड़ती है, लेकिन व्यवस्था की गलती सामने आने पर उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने पर कार्रवाई का सामना करने के बजाय उनकी समस्याओं का नीतिगत समाधान मिलना चाहिए। रोजगार और वेतन से जुड़े मामलों में सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
चौधरी ने भागीरथपुरा मामले और छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने जिम्मेदारी तय करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। साथ ही ड्रग से जुड़े मामलों में पूरे नेटवर्क की जांच करने तथा किसी अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर जवाबदेही तय करने की बात कही।
सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि केवल छोटे आरोपियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। प्रशासनिक लापरवाही या सरकारी तंत्र की विफलता सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और राजनीतिक स्तर पर भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने सरकारी धन के नुकसान की स्थिति में जिम्मेदार लोगों से उसकी वसूली की मांग की।
भोपाल के 90 डिग्री ब्रिज से जुड़े मुद्दे पर भी चौधरी ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने कहा कि राजधानी से जुड़े महत्वपूर्ण अधोसंरचना संबंधी सवालों पर जनता को समयबद्ध जानकारी मिलनी चाहिए।
किसानों के मुद्दे पर उन्होंने सोयाबीन की फसल में मौसम और बीमारी से हुए नुकसान का उल्लेख किया। चौधरी ने पीले मोजेक सहित फसल खराब होने की शिकायतों के बीच तत्काल सर्वे और प्रभावित किसानों को राहत देने की मांग की।
उन्होंने एक बीघा में 12 क्विंटल सोयाबीन उत्पादन के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति खेतों में जाकर देखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई किसान कम उत्पादन और फसल खराब होने की शिकायत कर रहे हैं।
सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर चौधरी ने कहा कि सरकार ने 5,700 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी की बात कही है, लेकिन किसानों को इससे कम कीमत पर उपज बेचने की स्थिति क्यों बन रही है। उन्होंने भावांतर योजना के पंजीयन, भुगतान और वास्तविक लाभ को लेकर भी स्पष्टता की मांग की।
उन्होंने कहा कि सोयाबीन की कटाई शुरू होने से पहले प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे होना जरूरी है। फसल कट जाने के बाद सर्वे होने पर वास्तविक नुकसान का आकलन मुश्किल हो सकता है। चौधरी ने उचित एमएसपी, समय पर सर्वे, फसल नुकसान का मुआवजा और सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ सुनिश्चित करने की मांग की।
चौधरी ने भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा पर भी आरोप लगाए और कहा कि नेताओं को विवाद और विभाजन के बजाय युवाओं, किसानों, रोजगार, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जवाबदेही और कार्रवाई चाहती है।
