भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने कहा कि नर्मदा नदी मध्यप्रदेश की जीवनरेखा है और सरदार सरोवर परियोजना के कारण सबसे अधिक नुकसान भी प्रदेश को ही उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक कृषि भूमि वन क्षेत्र और आदिवासी गांव मध्यप्रदेश में डूब क्षेत्र में आए। हजारों परिवारों का विस्थापन हुआ और पुनर्वास का सबसे बड़ा दायित्व भी प्रदेश ने निभाया। ऐसे में तत्कालीन आकलन के आधार पर मध्यप्रदेश ने 7669 करोड़ रुपए का दावा किया था। अब सरकार यह बताए कि वह दावा अचानक समाप्त कैसे हो गया।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार केवल यह प्रचार कर रही है कि गुजरात की लगभग 1500 करोड़ रुपए की देनदारी को कम कर 231 करोड़ रुपए में निपटा दिया गया और इसे बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है। लेकिन सरकार यह नहीं बता रही कि मध्यप्रदेश के हजारों करोड़ रुपए के दावे का क्या हुआ। उन्होंने कहा कि जनता को पूरे समझौते की सच्चाई जानने का अधिकार है और सरकार को सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए।
पटवारी ने सरकार से कई सीधे सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बताएं यह फैसला किस कानूनी और वित्तीय आधार पर लिया गया। क्या इस विषय पर राज्य मंत्रिमंडल में चर्चा हुई थी। क्या विधानसभा को विश्वास में लिया गया था। क्या पर्यावरण विशेषज्ञों और परियोजना से जुड़े जानकारों की राय ली गई थी। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में हुई बैठक में शामिल होने जा रहे अधिकारियों से उनकी विमान यात्रा के दौरान बातचीत हुई थी और अधिकारियों ने बताया था कि मध्यप्रदेश अपने दावे को लेकर पूरी तैयारी के साथ बैठक में जा रहा है। ऐसे में समझौते के बाद दावा समाप्त होने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
कांग्रेस ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को भी इस मुद्दे से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा। पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश पर पांच लाख इकसठ हजार करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज हो चुका है और सरकार लगातार नया कर्ज लेकर खर्च कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास की ठोस योजना के बजाय सरकार केवल प्रचार और आयोजनों पर ध्यान दे रही है। हाल ही में लिए गए नए कर्ज का उल्लेख करते हुए उन्होंने वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठाए।
दरअसल नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध को लेकर मध्यप्रदेश गुजरात महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच कई वर्षों से वित्तीय विवाद चल रहा था। मध्यप्रदेश का कहना था कि परियोजना से सबसे अधिक भूमि और गांव उसके प्रभावित हुए हैं इसलिए उसे मुआवजा मिलना चाहिए जबकि गुजरात परियोजना की लागत में अन्य राज्यों की हिस्सेदारी की मांग कर रहा था। हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में चारों राज्यों ने वन टाइम सेटलमेंट पर हस्ताक्षर कर वर्षों पुराने विवाद को समाप्त करने पर सहमति जताई। समझौते के तहत मध्यप्रदेश महाराष्ट्र और राजस्थान गुजरात को 550 550 करोड़ रुपए देंगे जबकि पुराने सभी वित्तीय दावों को समाप्त माना जाएगा। इसी समझौते को लेकर अब प्रदेश में सियासी घमासान तेज हो गया है और कांग्रेस सरकार से पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग कर रही है।
