स्वाइन फ्लू से बचने के लिए सबसे पहले हाथों की स्वच्छता पर ध्यान देना चाहिए। बाहर से घर लौटने के बाद साबुन और पानी से हाथों को अच्छी तरह साफ करना जरूरी है। यदि किसी जगह पर साबुन और पानी उपलब्ध नहीं है तो अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया जा सकता है। बिना हाथ साफ किए आंख नाक और मुंह को छूने से बचना चाहिए। संक्रमित सतह को छूने के बाद हाथ चेहरे तक पहुंचने पर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
खांसते और छींकते समय मुंह तथा नाक को टिश्यू या कोहनी से ढकने की आदत डालनी चाहिए। इस्तेमाल किए गए टिश्यू को तुरंत उचित स्थान पर फेंकना चाहिए। यदि घर परिवार या कार्यालय में किसी व्यक्ति को बुखार खांसी या फ्लू जैसे लक्षण हैं तो उसके बेहद करीब जाने से बचना बेहतर है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल भी संक्रमण से बचाव में मदद कर सकता है।
स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए पर्याप्त नींद लेना और संतुलित भोजन करना भी जरूरी है। रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए और भोजन में फल सब्जियां तथा अन्य पौष्टिक चीजों को शामिल करना चाहिए। हालांकि किसी खास खाद्य पदार्थ या घरेलू नुस्खे को स्वाइन फ्लू से बचाव का निश्चित उपाय नहीं माना जा सकता। संक्रमण से बचने के लिए साफ सफाई और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों को प्राथमिकता देना ज्यादा जरूरी है।
कुछ लोगों में फ्लू का संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। छोटे बच्चे बुजुर्ग गर्भवती महिलाएं और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को तेज बुखार लगातार खांसी गले में दर्द शरीर में दर्द अत्यधिक कमजोरी या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। सांस लेने में गंभीर परेशानी या हालत तेजी से बिगड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
लक्षण दिखाई देने पर दूसरों से उचित दूरी बनाए रखना भी जरूरी है ताकि संक्रमण आगे न फैले। बीमारी के दौरान पर्याप्त आराम करना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार लेना चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या दूसरी दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इन्फ्लूएंजा वायरल संक्रमण है और हर स्थिति में एंटीबायोटिक उपयोगी नहीं होती।
कुल मिलाकर स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए हाथों की नियमित सफाई खांसते समय सावधानी भीड़भाड़ वाली जगहों पर सतर्कता और बीमार व्यक्ति से उचित दूरी जैसी आदतें अपनाना जरूरी है। साथ ही लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बीमारी को गंभीर होने से रोकने में मदद कर सकता है। जागरूकता और सावधानी के जरिए संक्रमण के जोखिम को कम करने की कोशिश की जा सकती है।
