बैठक में चारों देशों ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा परिषद में सुधार पहले की तुलना में अधिक जरूरी हो गया है। G4 का मानना है कि परिषद की मौजूदा संरचना करीब 80 साल पुरानी है और आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं करती। इसी वजह से परिषद की प्रतिनिधित्व क्षमता, वैधता, विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बैठक में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा, जर्मनी के विदेश मंत्री डॉ. योहान डेविड वाडेफुल और जापान के विदेश मंत्री मोतेगी तोशिमित्सु शामिल हुए। मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार से जुड़ी अंतर-सरकारी वार्ताओं में हुई प्रगति और चर्चाओं की समीक्षा की।
G4 देशों ने सुरक्षा परिषद की सदस्यता में स्थायी और गैर-स्थायी, दोनों श्रेणियों में विस्तार को सुधार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। चारों देशों ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच दोनों श्रेणियों में सदस्यता बढ़ाने के समर्थन की व्यापक मौजूदगी है।
अफ्रीका के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की जरूरत पर भी बैठक में जोर दिया गया। G4 देशों ने सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वकारी और प्रभावी बनाने के लिए ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता बताई, जो वर्तमान वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को बेहतर तरीके से दर्शा सके।
G4 की ओर से सुधार प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाने और ठोस परिणाम हासिल करने की मांग की गई। देशों ने सुरक्षा परिषद की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में व्यापक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए अंतर-सरकारी वार्ता प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है और G4 इस प्रक्रिया में लगातार सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।
न्यूयॉर्क में हुई चर्चा के बाद अब G4 देशों की अगली समीक्षा बैठक दिल्ली में प्रस्तावित है। इसमें सुधार प्रक्रिया में हुई प्रगति और आगे की दिशा पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक के जरिए चारों देश सुरक्षा परिषद में प्रतिनिधित्व बढ़ाने, स्थायी और गैर-स्थायी सदस्यता के विस्तार तथा सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर अपने समन्वय की समीक्षा करेंगे।
G4 देशों की बैठक ऐसे समय हुई है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना को वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप बनाने की मांग लगातार उठ रही है। सुधार समर्थक देशों का जोर परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वकारी, विश्वसनीय और प्रभावी बनाने पर है। G4 ने भी इसी दिशा में प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और लंबे समय से लंबित सुधार को ठोस रूप देने की आवश्यकता पर अपना रुख दोहराया है।
