बाजार बंद होने पर बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत टूटकर 74,764.23 पर पहुंच गया। एनएसई का निफ्टी 50 भी 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,431.50 पर बंद हुआ। लगातार तीसरे सत्र की गिरावट ने बाजार में बनी कमजोर धारणा को और मजबूत किया।
सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 75,577.58 के स्तर के मुकाबले 361.36 अंक यानी 0.47 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,216.22 पर खुला था। कारोबार के दौरान बिकवाली बढ़ने से यह दिन के निचले स्तर 74,764.23 तक पहुंच गया। इस स्तर पर सूचकांक में 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
निफ्टी 50 भी अपने पिछले बंद स्तर 23,635.10 के मुकाबले 113 अंक यानी 0.47 प्रतिशत नीचे 23,522.05 पर खुला। दिन के कारोबार में यह और फिसलकर 23,431.50 के निचले स्तर तक पहुंच गया। इस तरह निफ्टी में दिन के दौरान 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
व्यापक बाजारों में भी निवेशकों का रुख कमजोर रहा। निफ्टी मिडकैप 0.51 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। क्षेत्रवार कारोबार में निफ्टी आईटी सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ और इसमें 3.24 प्रतिशत की गिरावट रही। निफ्टी रियल्टी 2.23 प्रतिशत तथा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 1.23 प्रतिशत कमजोर हुए। निफ्टी एफएमसीजी, प्राइवेट बैंक, मीडिया और फार्मा सूचकांक भी गिरावट के साथ बंद हुए।
इसके विपरीत निफ्टी मेटल में 1.79 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी 50 में अदाणी एंटरप्राइजेज, मैक्स हेल्थ, अदाणी पोर्ट्स, कोल इंडिया, टाटा स्टील, हिंडाल्को, अपोलो हॉस्पिटल और एनटीपीसी प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में रहे। इन कंपनियों के शेयरों में करीब पांच से एक प्रतिशत तक की तेजी दर्ज हुई। दूसरी तरफ इंफोसिस, एचडीएफसी लाइफ, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा सबसे ज्यादा कमजोर शेयरों में शामिल रहे।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक पश्चिम एशिया में लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की आशंका को ध्यान में रखते हुए बाजार की कीमतों का आकलन कर रहे हैं। लगातार जारी लड़ाई और जवाबी कार्रवाई के कारण निकट भविष्य में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहने की संभावना बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
विशेषज्ञों ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता लंबे समय तक बनी रहने पर प्रमुख केंद्रीय बैंकों के सामने आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन कायम करने की चुनौती बढ़ सकती है। ऊर्जा की बढ़ती लागत आर्थिक गतिविधियों और कीमतों की स्थिरता दोनों के लिए जोखिम पैदा कर रही है। बॉन्ड यील्ड और करेंसी बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के सतर्क रहने की संभावना है। इससे जोखिम लेने की उनकी क्षमता सीमित रह सकती है और बाजार की धारणा पर दबाव बना रह सकता है।
