नए हेलीकॉप्टर और जेट के इस्तेमाल को आसान बनाने के लिए प्रदेश में हेलीपैड और हवाई पट्टियों के विस्तार पर भी काम किया जाएगा। सरकार अगले दो साल में करीब 63 नए हेलीपैड बनाने की योजना पर काम कर रही है। इनका नेटवर्क इस तरह विकसित करने की तैयारी है कि लगभग हर 50 किलोमीटर के दायरे में हेलीपैड उपलब्ध हो सके। इससे मुख्यमंत्री और अन्य वीआईपी को प्रदेश के अलग अलग जिलों और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचने में सुविधा मिल सकती है।
फिलहाल मध्यप्रदेश में करीब 250 हेलीपैड होने की जानकारी दी गई है। कई बार किसी जिले के दौरे के दौरान पहले विमान से एयरपोर्ट तक पहुंचना पड़ता है और उसके बाद सड़क या हेलीकॉप्टर से आगे का सफर करना होता है। नए हेलीपैड का नेटवर्क तैयार होने के बाद संबंधित क्षेत्र के नजदीक हेलीकॉप्टर से पहुंचने का विकल्प बढ़ सकता है।
एयरबस ACH160 आधुनिक सुविधाओं से लैस हेलीकॉप्टर है। मध्यप्रदेश सरकार के लिए तैयार किए जा रहे हेलीकॉप्टर में दो पायलट के साथ नौ लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी। कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार इस मॉडल को अधिकतम 10 यात्रियों की क्षमता के साथ भी कॉन्फिगर किया जा सकता है। इसकी अधिकतम उड़ान अवधि करीब चार घंटे 30 मिनट बताई गई है। इसमें आधुनिक तकनीक और कैमरा सिस्टम जैसी सुविधाएं भी मौजूद रहेंगी।
नए जेट के संचालन की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। मध्यप्रदेश के पायलट विश्वास राय और अरविंद सिंह ने जुलाई में कनाडा जाकर बॉम्बार्डियर के प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया है। जेट को प्रदेश के ज्यादा से ज्यादा एयरफील्ड पर संचालित करने के लिए रनवे की लंबाई और दूसरी जरूरी सुविधाओं को विकसित करना भी जरूरी होगा।
बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 के संचालन के लिए कम से कम करीब 1800 मीटर लंबे रनवे की जरूरत बताई गई है। बेहतर संचालन के लिए करीब 2100 मीटर लंबा रनवे उपयोगी माना जा रहा है। विभागीय आकलन के मुताबिक प्रदेश के 28 एयरफील्ड में से फिलहाल करीब 10 स्थान ऐसे हैं जहां यह जेट उतर सकता है। इनमें सात एयरपोर्ट और तीन हवाई पट्टियां शामिल हैं।
प्रदेश की करीब 20 हवाई पट्टियों में अभी सिर्फ तीन जगह रनवे 1800 मीटर या उससे ज्यादा लंबा है। इनमें मंदसौर की नौलखा बीड सिवनी और मंडला की कान्हा हवाई पट्टी शामिल हैं। सतना एयरपोर्ट का रनवे करीब 1300 मीटर लंबा होने के कारण यहां इस जेट के संचालन के लिए विस्तार की जरूरत होगी।
सरकार करीब 20 हवाई पट्टियों के विस्तार की योजना भी बना रही है। विभागीय अनुमान के मुताबिक इस काम पर 300 से 400 करोड़ रुपए तक खर्च हो सकता है। रनवे विस्तार के अलावा जमीन एप्रोच रोड सुरक्षा क्षेत्र और दूसरी विमानन सुविधाओं को भी विकसित करना होगा।
नए जेट और हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल मुख्य रूप से मुख्यमंत्री और अन्य वीआईपी यात्राओं के लिए किया जाएगा। सरकार के मुताबिक पिछले ढाई साल में विमान और हेलीकॉप्टर किराए पर हर साल औसतन 60 से 70 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। नए हवाई बेड़े के आने के बाद किराए पर होने वाला यह खर्च बचने की संभावना है। सरकार के पास मौजूद पुराना एयरबस EC155 B1 हेलीकॉप्टर वर्ष 2011 में खरीदा गया था और बढ़ते रखरखाव खर्च के बीच नए हेलीकॉप्टर की जरूरत महसूस की गई।
