हालांकि यह सुविधा आम उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध नहीं होगी। OpenAI ने स्पष्ट किया है कि केवल मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों और प्रतिष्ठित शोध संस्थानों से जुड़े वैज्ञानिक और शोधकर्ता ही इस कार्यक्रम के लिए आवेदन कर सकेंगे। यदि किसी शोधकर्ता का चयन होता है तो वह अपने संस्थान के अधिकतम चार अन्य सहयोगियों को भी इस कार्यक्रम में शामिल कर सकता है, जिससे टीम आधारित अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।
कंपनी इस कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी। शुरुआती चरण में इस वर्ष लगभग 10 हजार शोधकर्ताओं को शामिल किया जाएगा। इसके बाद दायरा लगातार बढ़ाया जाएगा और वर्ष 2027 तक लगभग एक लाख शोधकर्ताओं को इसका लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और केवल उन संस्थानों को प्राथमिकता मिलेगी जिनकी शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में मजबूत पहचान है।
चयनित प्रतिभागियों को OpenAI के सबसे उन्नत AI मॉडल्स तक मुफ्त पहुंच मिलेगी। इनमें नई GPT-5.6 मॉडल फैमिली के साथ ChatGPT, ChatGPT Work और Codex जैसे प्रोफेशनल टूल्स भी शामिल होंगे। इसके अलावा सामान्य उपयोगकर्ताओं की तुलना में अधिक उपयोग सीमा और बड़े कॉन्टेक्स्ट विंडो जैसी अतिरिक्त सुविधाएं भी दी जाएंगी, जिससे बड़े स्तर के शोध कार्य करना आसान होगा।
इन टूल्स की मदद से शोधकर्ता बड़े डेटा सेट का विश्लेषण कर सकेंगे, प्रोग्रामिंग कोड तैयार कर पाएंगे, शोध पत्रों की समीक्षा कर सकेंगे और रिसर्च ग्रांट प्रस्ताव तैयार करने जैसे जटिल कार्य भी कम समय में पूरे कर सकेंगे। इससे शोध प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और उत्पादक बनने की उम्मीद है।
OpenAI ने लाइफ साइंस क्षेत्र के लिए भी विशेष व्यवस्था की है। कंपनी 75 से अधिक विशेष AI टूल्स उपलब्ध कराएगी, जिनका उपयोग जेनेटिक्स, जीनोमिक्स, प्रोटीन मॉडलिंग, दवा खोज और जैविक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में किया जा सकेगा। इसके साथ ही शोधकर्ता ChatGPT को वैज्ञानिक शोध पत्रों, सार्वजनिक डेटाबेस, कम्प्यूटेशनल नोटबुक और अन्य रिसर्च प्लेटफॉर्म से जोड़कर विभिन्न स्रोतों से जानकारी का विश्लेषण भी कर सकेंगे।
कंपनी का मानना है कि आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान केवल बड़े बजट और अत्याधुनिक संसाधनों वाले संस्थानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बेहतर AI तकनीक अधिक से अधिक वैज्ञानिकों तक पहुंचने से नई खोजों और नवाचारों की गति तेज होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शोधकर्ता दोहराए जाने वाले तकनीकी कार्य AI की मदद से कम समय में पूरा कर सकेंगे तो वे अपना अधिक समय नए प्रयोगों और खोजों पर केंद्रित कर पाएंगे, जिससे आने वाले वर्षों में वैश्विक वैज्ञानिक अनुसंधान को नई रफ्तार मिल सकती है।
