नई दिल्ली ।दुनिया की 100 से अधिक कंपनियों को निशाना बनाकर किए गए एक बड़े साइबर हमले ने डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है। इस हमले में पांच दिनों के भीतर छह लाख से ज्यादा क्रेडिट कार्ड की जानकारी चोरी किए जाने की बात सामने आई है। बताया गया है कि हमले को अंजाम देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित तकनीक और कम लागत वाले टूल्स का इस्तेमाल किया गया।
इस साइबर हमले की एक खास बात यह बताई गई है कि हमलावरों ने पूरा सिस्टम तैयार करने में करीब 8 हजार अमेरिकी डॉलर खर्च किए। इसके बावजूद हमले का दायरा काफी बड़ा रहा और बड़ी संख्या में कंपनियों के डिजिटल सिस्टम को निशाना बनाया गया। चोरी किए गए डेटा में छह लाख से अधिक क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारी शामिल होने की बात कही गई है।
जानकारी के अनुसार, हमले की गतिविधियों में AI एजेंट्स की भूमिका महत्वपूर्ण रही। विशेषज्ञों के मुताबिक, AI आधारित साइबर अटैक में इंसान मुख्य रूप से निर्देशन या निगरानी का काम कर सकता है, जबकि कई दूसरी प्रक्रियाएं स्वचालित तरीके से पूरी की जा सकती हैं। इससे साइबर हमलों को बड़े स्तर पर संचालित करना आसान हो सकता है।
बताया गया है कि हमलावरों ने चीनी AI मॉडल DeepSeek और Kimi का इस्तेमाल किया। इसके साथ ही Claude के एक संस्करण का उपयोग हमले की प्रक्रियाओं को स्वचालित बनाने के लिए किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस तकनीकी संयोजन ने हमले को कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ आगे बढ़ाने में मदद की।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब AI एजेंट्स के जरिए साइबर हमलों के कई मामले सामने आने की चर्चा है। पारंपरिक साइबर हमलों में जहां कई चरणों के लिए मानव ऑपरेटरों की जरूरत होती थी, वहीं AI आधारित सिस्टम कुछ कार्यों को तेजी से और स्वचालित तरीके से पूरा कर सकते हैं। इससे हमलों की गति और उनके संभावित दायरे को लेकर सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ी है।
अमेरिका के डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया के लिए अमेरिकी अटॉर्नी मिचेल आर. सेरविन ने आरोप लगाया कि इस गतिविधि से जुड़े अपराधियों का चीन के साथ संबंध है। उनके अनुसार, इन लोगों को दुनियाभर में हैकिंग और चोरी जैसी गतिविधियों के लिए चीन से समर्थन या अनुमति मिली हुई है।
अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से भी आरोप लगाया गया कि चीन इस तरह की साइबर गतिविधियों के जरिए अपनी अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचाने और वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, ये आरोप संबंधित साइबर हमले और उससे जुड़े लोगों की गतिविधियों के संदर्भ में लगाए गए हैं।
इस घटना ने यह भी दिखाया है कि AI तकनीक का इस्तेमाल केवल सामान्य डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं है। कम लागत वाले AI टूल्स का उपयोग साइबर अपराधों में होने से कंपनियों के डेटा, वित्तीय जानकारी और डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा के सामने नई चुनौतियां पैदा हो रही हैं।
छह लाख से अधिक क्रेडिट कार्ड की जानकारी की चोरी का दावा इस घटना की व्यापकता को दर्शाता है। 100 से अधिक कंपनियों को निशाना बनाए जाने और महज पांच दिनों में बड़ी मात्रा में डेटा हासिल किए जाने की जानकारी ने AI आधारित स्वचालित साइबर हमलों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
