वैंकूवर में खेले गए इस मुकाबले में दोनों टीमों ने शुरुआत से ही सावधानी के साथ खेल दिखाया। निर्धारित 90 मिनट और अतिरिक्त समय तक कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। दोनों ओर से कई अच्छे आक्रमण हुए लेकिन मजबूत रक्षापंक्ति और शानदार गोलकीपिंग के कारण स्कोर गोलरहित बना रहा। आखिरकार मुकाबले का फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ जहां स्विट्जरलैंड ने दबाव में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए जीत अपने नाम कर ली।
स्विट्जरलैंड की जीत के सबसे बड़े नायक रूबेन वर्गास रहे जिन्होंने निर्णायक पेनल्टी को गोल में बदलकर टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। मुकाबले के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें मैच खेलने को लेकर भी संशय था लेकिन टीम के लिए जीत दिलाना उनके करियर का सबसे यादगार पल बन गया। उन्होंने बताया कि पेनल्टी लेने के समय वह पूरी तरह आत्मविश्वास से भरे हुए थे और खुश हैं कि टीम की उम्मीदों पर खरे उतर सके।
मैच शुरू होने से पहले स्विट्जरलैंड को बड़ा झटका तब लगा जब टीम के प्रमुख खिलाड़ी जोहान मंजांबी घुटने की चोट के कारण मुकाबले से बाहर हो गए। उनके नहीं खेलने से पहले हाफ में टीम के आक्रमण की धार कुछ कमजोर दिखाई दी। दूसरी ओर कोलंबिया ने गेंद पर अधिक नियंत्रण रखा लेकिन वह इसे गोल में नहीं बदल सकी।
कोलंबिया की ओर से गुस्तावो पुएर्ता ने शानदार प्रयास किया लेकिन स्विट्जरलैंड के गोलकीपर ग्रेगर कोबेल ने बेहतरीन बचाव कर टीम को बढ़त लेने से रोक दिया। दूसरे हाफ में लुइस सुआरेज को भी गोल करने का अवसर मिला लेकिन उनका शॉट लक्ष्य से बाहर निकल गया। वहीं स्विट्जरलैंड के फैबियन रीडर की दमदार वॉली को कोलंबिया के गोलकीपर कैमिलो वर्गास ने शानदार तरीके से रोक दिया।
अतिरिक्त समय में मुकाबला और भी रोमांचक हो गया। कोलंबिया के जॉन लुकुमी का हेडर क्रॉसबार से टकराकर बाहर चला गया जबकि स्विट्जरलैंड के जेकी अमदौनी के प्रयास को भी गोलकीपर ने विफल कर दिया। इसके बाद पेनल्टी शूटआउट में ग्रेगर कोबेल ने अहम बचाव किया और रूबेन वर्गास की निर्णायक किक ने स्विट्जरलैंड को सात दशक बाद विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचाकर नया इतिहास रच दिया।
अब फुटबॉल प्रेमियों की नजरें क्वार्टर फाइनल पर होंगी जहां स्विट्जरलैंड की चुनौती मौजूदा दावेदार अर्जेंटीना के सामने होगी। यह मुकाबला विश्व कप के सबसे रोमांचक मैचों में से एक माना जा रहा है।
