राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी की स्थिति की तुलना एक ऐसी एक्स गर्लफ्रेंड से की, जिसे उसका बॉयफ्रेंड छोड़कर आगे बढ़ चुका है, लेकिन वह अब भी उसके प्यार में है। इसी दौरान उन्होंने तंज करते हुए कहा कि उन्हें डर है कि कहीं कोई दिलजला आशिक की तरह उनकी याद में अपनी नसें न काट ले। चड्ढा ने कहा कि उन्हें आम आदमी पार्टी की चिंता रहती है।
दरअसल, पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से अपना नाम गायब होने के बाद राघव चड्ढा ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि पंजाब की AAP सरकार ने राजनीतिक विद्वेष के कारण उनका नाम वोटर लिस्ट में शिफ्टेड कैटेगरी में डाल दिया। चड्ढा का कहना था कि पार्टी छोड़ने के बाद से AAP उन्हें लगातार निशाना बना रही है।
चड्ढा ने यह भी कहा था कि ऐसा लगता है कि वह अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को परेशान कर रहे हैं। उनके मुताबिक पार्टी के लोग दिन-रात उनके बारे में सोच रहे हैं और उन पर हमला करने की कोशिश कर रहे हैं।
इसके बाद आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की वोटर लिस्ट में राघव चड्ढा का नाम जुड़ने को लेकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। AAP की दिल्ली इकाई के प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने कहा कि 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में राजिंदर नगर के संबंधित पोलिंग पार्ट में 746 मतदाता थे। बाद में राघव चड्ढा का नाम 747वें मतदाता के रूप में जुड़ा।
सौरभ भारद्वाज के अनुसार राजिंदर नगर की मतदाता सूची में सीरियल नंबर 747 पर राघव चड्ढा, पिता सुनील चड्ढा और उम्र 37 साल दर्ज है। उन्होंने चड्ढा के तीन सितंबर के बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने पंजाब में दोबारा मतदाता के तौर पर पंजीकरण कराने की बात कही थी। भारद्वाज ने चुनाव आयोग से पूछा कि जब ड्राफ्ट सूची में 746 नाम थे तो 747वां नाम किस प्रक्रिया के तहत जोड़ा गया।
AAP प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने भी इस मामले में राघव चड्ढा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक चड्ढा ने 26 अगस्त को दिल्ली में वोट बनवाने के लिए फॉर्म-6 दाखिल किया था और दो सितंबर को उनका आवेदन मंजूर हो गया। ढांडा ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद तीन सितंबर को चड्ढा पंजाब सरकार पर उनका वोट कटवाने का आरोप लगा रहे थे।
राघव चड्ढा ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग की सभी लागू गाइडलाइंस और तय प्रक्रिया का पालन किया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने भी स्पष्ट किया कि उनका नाम नियमों के तहत जोड़ा गया। कार्यालय के मुताबिक 26 अगस्त को फॉर्म-6 के जरिए आवेदन किया गया था और सात दिन की अनिवार्य नोटिस अवधि पूरी होने के बाद दो सितंबर को निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी ने आवेदन मंजूर किया।
मुख्य निर्वाचन कार्यालय के अनुसार आवेदन मंजूर होने के बाद संबंधित नाम मसौदा मतदाता सूची की अंतिम क्रम संख्या के बाद डेटाबेस में दिखाई देता है। अंतिम मतदाता सूची पुनरीक्षण अवधि पूरी होने और सभी दावों तथा आपत्तियों के निपटारे के बाद प्रकाशित की जाएगी।
