समिति में कांग्रेस के पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ शामिल थे। रिपोर्ट को भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनाया था। प्रकाशित कार्यवाही में रिपोर्ट को लेकर किसी तरह की असहमति दर्ज नहीं की गई थी। समिति ने UPI के लिए टियर आधारित MDR या राजस्व व्यवस्था को जल्द अधिसूचित कर लागू करने की जरूरत बताई थी।
रिपोर्ट में UPI इकोसिस्टम की वित्तीय स्थिरता का मुद्दा उठाया गया था। समिति के अनुसार, डिजिटल भुगतान का विस्तार होने के साथ उसके बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने और तकनीकी व्यवस्था पर खर्च भी बढ़ता है। ऐसे में केवल सरकारी प्रोत्साहन राशि के सहारे लंबे समय तक UPI व्यवस्था को संचालित करना वित्तीय रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी वजह से एक व्यवहारिक और टिकाऊ राजस्व मॉडल की जरूरत बताई गई थी।
समिति ने 2026-27 के बजट में UPI और RuPay पर जीरो-MDR नीति से जुड़ी लागत की भरपाई के लिए 2,000 करोड़ रुपये के प्रावधान का भी उल्लेख किया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि UPI पर लेनदेन की संख्या लगातार बढ़ रही है और बड़ी संख्या में नए उपयोगकर्ता डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़ रहे हैं। इसके बावजूद मौजूदा सरकारी प्रोत्साहन राशि उद्योग की वास्तविक लागत का सीमित हिस्सा ही पूरा करती है।
वर्तमान विवाद प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR को लेकर है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट लेनदेन पर लागू होनी है। 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान पर कोई MDR नहीं लगेगा। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI लेनदेन भी पहले की तरह मुफ्त रहेंगे। छोटे कारोबारियों के लिए जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले लेनदेन पर भी शुल्क नहीं लगेगा।
MDR को लेकर यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसे सरकार की ओर से लगाया गया टैक्स नहीं माना गया है। यह भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों के बीच निर्धारित ढांचे के तहत लागू होने वाला शुल्क है। इससे प्राप्त राशि बैंकों और भुगतान सेवा से जुड़े अन्य हिस्सेदारों के बीच वितरित की जाएगी।
राहुल गांधी ने नए MDR ढांचे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इसे ‘मोदी टैक्स’ बताते हुए व्यवस्था वापस लेने की मांग की। उन्होंने सरकार पर बाहरी दबाव में निर्णय लेने का आरोप भी लगाया। दूसरी ओर, सरकार की ओर से कहा गया है कि MDR को टैक्स के रूप में देखना सही नहीं है और नई व्यवस्था UPI भुगतान इकोसिस्टम की वित्तीय जरूरतों से जुड़ी है।
ऐसे में वर्तमान राजनीतिक बहस में एक तरफ प्रस्तावित MDR का विरोध है, जबकि दूसरी तरफ UPI के लिए टिकाऊ राजस्व व्यवस्था की जरूरत से जुड़ा तर्क है। वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट में इसी तरह के राजस्व मॉडल की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। UPI शुल्क व्यवस्था में बदलाव के बाद डिजिटल भुगतान की लागत, कारोबारियों पर प्रभाव और भुगतान व्यवस्था की वित्तीय स्थिरता को लेकर चर्चा जारी है।
