नई दिल्ली। टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को टाटा संस की कमान संभालते हुए अभी और पांच साल हो गए हैं। टाटा संस लिमिटेड के बोर्ड ने गुरुवार को उनके कार्यकाल को पांच साल के लिए बढ़ाने की मंजूरी दे दी। इसके साथ ही चंद्रशेखरन फरवरी 2032 तक समूह के चेयरमैन बने रहेंगे। उनका मौजूदा दूसरा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना था।
चंद्रशेखरन के कार्यकाल में विस्तार का फैसला ऐसे समय में आया है, जब टाटा समूह ने पारंपरिक कारोबारों के साथ-साथ विमानन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, बैटरी और डिजिटल कारोबार जैसे नए क्षेत्रों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। बोर्ड के फैसले के बाद अब अगले पांच वर्षों के लिए समूह के नेतृत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।
65 साल की उम्र में रिटायरमेंट की नीति, 70 तक जारी रह सकता है कार्यकाल
टाटा समूह की आंतरिक नीति के अनुसार, कार्यकारी पदों पर नियुक्त अधिकारियों के लिए आमतौर पर 65 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति का प्रावधान है। हालांकि, गैर-कार्यकारी भूमिका में अधिकारी 70 वर्ष की उम्र तक पद पर बने रह सकते हैं।
एन. चंद्रशेखरन की उम्र फिलहाल 63 वर्ष बताई गई है। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में पूरा होना था, जब वे 65 वर्ष के हो जाएंगे। अब पांच साल का नया कार्यकाल मिलने के बाद वे फरवरी 2032 तक टाटा संस के चेयरमैन बने रह सकते हैं। उस समय उनकी उम्र 70 वर्ष होगी।
चंद्रशेखरन के कार्यकाल को बढ़ाने का फैसला टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व में निरंतरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, नए कार्यकाल के दौरान समूह की रणनीति और कारोबार के विस्तार को लेकर आगे के फैसले बोर्ड और प्रबंधन की योजनाओं के अनुसार होंगे।
अक्टूबर 2016 में टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए थे
एन. चंद्रशेखरन का टाटा समूह से जुड़ाव काफी पुराना है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1987 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में इंटर्न के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने कंपनी में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं और आगे चलकर समूह के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे।
अक्टूबर 2016 में वे पहली बार टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए थे। इसके करीब चार महीने बाद जनवरी 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया। तब से वे समूह के रणनीतिक फैसलों और कारोबार के विस्तार में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने पारंपरिक उद्योगों के साथ नए कारोबारी क्षेत्रों में निवेश और विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाए। विमानन, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और डिजिटल कारोबार को समूह की आगे की विकास रणनीति का हिस्सा बनाया गया।
नौ साल में समूह का कारोबार और मुनाफा बढ़ा
एन. चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह के वित्तीय प्रदर्शन में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2020 से वित्त वर्ष 2026 के बीच समूह के राजस्व और मुनाफे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
राजस्व में दोगुने से अधिक की बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 2020 में टाटा समूह का राजस्व 7.89 लाख करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2026 में यह बढ़कर 16.24 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस तरह छह वित्त वर्षों के दौरान समूह के राजस्व में काफी विस्तार हुआ।
मुनाफा 32 हजार करोड़ से बढ़कर 1.71 लाख करोड़
समूह के मुनाफे में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2020 में टाटा समूह का मुनाफा करीब 32 हजार करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 1.71 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह वृद्धि समूह के विभिन्न कारोबारों के प्रदर्शन और विस्तार से जुड़ी हुई है।
सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण बढ़ा
टाटा समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में भी वृद्धि हुई। वर्ष 2020 में इन कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 9.31 लाख करोड़ रुपये था। वर्ष 2026 में यह बढ़कर 24.39 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।
इन आंकड़ों के अनुसार, चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह के कारोबार का आकार, मुनाफा और सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार मूल्य बढ़ा है। हालांकि, अलग-अलग कंपनियों के प्रदर्शन और बाजार परिस्थितियों का प्रभाव इन आंकड़ों पर पड़ता है।
टाटा समूह ने नए क्षेत्रों में बढ़ाया दायरा
एन. चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने अपने कारोबार को पारंपरिक उद्योगों से आगे बढ़ाने पर जोर दिया। विमानन क्षेत्र में समूह की गतिविधियों का विस्तार हुआ। इसके अलावा सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, बैटरी और डिजिटल कारोबार जैसे क्षेत्रों में भी समूह ने कदम बढ़ाए।
टाटा समूह के लिए इन नए क्षेत्रों में प्रवेश का उद्देश्य भविष्य की औद्योगिक और तकनीकी जरूरतों के अनुरूप कारोबार का विस्तार करना है। इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में विनिर्माण क्षमता विकसित करने पर भी ध्यान दिया गया है।
समूह की प्रमुख कंपनियों में टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एयर इंडिया शामिल हैं। इन कंपनियों के अलग-अलग कारोबार हैं, लेकिन टाटा संस समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
टाटा समूह, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में क्या अंतर है?
टाटा समूह से जुड़े तीन नाम अक्सर चर्चा में रहते हैं—टाटा समूह, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स। इन तीनों की भूमिकाएं अलग-अलग हैं।
टाटा समूह
टाटा समूह उन अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों का समूह है, जो टाटा नाम के तहत संचालित होते हैं। इसमें टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एयर इंडिया जैसी कंपनियां शामिल हैं। समूह के कारोबार आईटी, वाहन, इस्पात, ऊर्जा, विमानन और अन्य क्षेत्रों में फैले हुए हैं।
टाटा संस
टाटा संस टाटा समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी है। यह समूह की प्रमुख कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है और समूह के बड़े कारोबारी फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। टाटा संस के चेयरमैन के रूप में एन. चंद्रशेखरन समूह के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा हैं।
टाटा ट्रस्ट्स
टाटा ट्रस्ट्स सामाजिक और परोपकारी कार्यों से जुड़े ट्रस्टों का समूह है। ये शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण और अन्य जनहितकारी गतिविधियों में योगदान करते हैं। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई जाती है।
इस तरह टाटा समूह कारोबारों का व्यापक नेटवर्क है, टाटा संस उसकी प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और टाटा ट्रस्ट्स सामाजिक एवं परोपकारी गतिविधियों से जुड़े ट्रस्टों का समूह है।
आगे भी समूह की रणनीति पर रहेगी नजर
टाटा संस के बोर्ड द्वारा एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल पांच साल बढ़ाए जाने के बाद अब वे फरवरी 2032 तक चेयरमैन बने रहेंगे। उनके नेतृत्व में समूह ने पिछले वर्षों में कारोबार के विस्तार और नए क्षेत्रों में प्रवेश पर जोर दिया है।
आने वाले वर्षों में टाटा समूह की रणनीति में विमानन, तकनीक, विनिर्माण, बैटरी और डिजिटल कारोबार जैसे क्षेत्रों की भूमिका महत्वपूर्ण रह सकती है। बोर्ड के फैसले से समूह के शीर्ष नेतृत्व में निरंतरता बनी रहेगी और आगे की कारोबारी योजनाओं को उसी दिशा में आगे बढ़ाया जा सकेगा।
