जेपी नड्डा ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत का प्रस्ताव मिलने के बाद चर्चा शुरू हुई। उनके अनुसार, प्रतिनिधिमंडल के साथ पहले मौखिक स्तर पर विस्तृत बातचीत हुई और बाद में उन्हें एक लिखित ज्ञापन भी सौंपा गया। उन्होंने कहा कि सरकार संवाद के माध्यम से विषय को समझने और समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रही है। साथ ही उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन समाप्त करने का अनुरोध किया।
हालांकि, CJP की ओर से इस मुलाकात को लेकर अलग रुख सामने आया। संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि बैठक में उनकी प्रमुख मांगों पर कोई स्पष्ट या ठोस आश्वासन नहीं दिया गया। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने सहित कई महत्वपूर्ण मांगें सरकार के समक्ष रखीं। उनका कहना है कि संबंधित मुद्दों पर उचित स्तर पर चर्चा का भरोसा जरूर मिला है, लेकिन जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं को लेकर अपनी चिंताओं का उल्लेख किया गया है। संगठन का कहना है कि वह पिछले कई सप्ताह से इन मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहा है। ज्ञापन में विभिन्न मांगों के साथ परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।
संगठन ने अपने ज्ञापन में कुछ अन्य मांगें भी सरकार के समक्ष रखी हैं। इनमें आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से संबंधित मुद्दों, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ कार्रवाई तथा नीट-2026 पेपर लीक प्रकरण से प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिए जाने जैसी मांगें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान पुलिस की ओर से बल प्रयोग किया गया, जिसे रोकने की भी मांग की गई है।
सरकार और आंदोलनकारियों के बीच शुरू हुआ यह संवाद ऐसे समय में हुआ है जब संसद का मानसून सत्र भी चल रहा है और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज है। विपक्ष लगातार इस विषय को संसद में उठा रहा है, जबकि सरकार बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रही है। फिलहाल दोनों पक्षों के रुख में अंतर बना हुआ है। सरकार प्रदर्शन समाप्त करने की अपील कर रही है, जबकि आंदोलनकारी अपनी मांगों पर ठोस निर्णय आने तक धरना जारी रखने की बात कह रहे हैं। आने वाले दिनों में आगे की बातचीत और संभावित निर्णय पर सभी की निगाहें बनी रहेंगी।
