अध्यक्ष पद का मुकाबला खास तौर पर चर्चा में रहा। मतगणना के अलग अलग चरणों में ABVP और NSUI के उम्मीदवारों के बीच बढ़त बदलती रही। अंतिम उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यश डबास को 22434 वोट मिले जबकि NSUI के विजय शंकर मीणा को 21390 वोट प्राप्त हुए। इस तरह डबास ने 1044 वोट के अंतर से अध्यक्ष पद अपने नाम किया। शुरुआती चरणों में NSUI के उम्मीदवार ने भी बढ़त बनाई थी लेकिन बाद के राउंड में तस्वीर बदली और यश डबास आगे निकल गए।
सचिव पद पर ABVP की रिया छावड़ी ने जीत दर्ज की। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उन्हें 19846 वोट मिले जबकि NSUI की नम्रता चौधरी को 13963 वोट मिले। संयुक्त सचिव पद पर ABVP के लक्ष्य राज सिंह विजयी रहे। इस सीट पर मुकाबला काफी करीबी रहा। लक्ष्य राज सिंह को 14965 वोट मिले जबकि निर्दलीय उम्मीदवार विशेष यादव को 14836 और NSUI के गोपाल चौधरी को 14482 वोट प्राप्त हुए। तीनों उम्मीदवारों के बीच अंतर कम रहा और अंतिम चरण में लक्ष्य राज सिंह ने यह सीट अपने नाम की।
उपाध्यक्ष पद का परिणाम इस चुनाव की अलग तस्वीर सामने लाता है। यहां निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शोकीन ने जीत दर्ज की। उन्हें 28873 वोट मिले जबकि ABVP के ईशू मौर्य को 15346 और NSUI के वीर चतरथ को 4010 वोट मिले। मतगणना के शुरुआती दौर से ही शोकीन इस मुकाबले में आगे बने रहे और अंत तक उनकी बढ़त कायम रही।
दीपांशु शोकीन का चुनाव अभियान भी चर्चा में रहा। वे स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर मैदान में थे और छात्र सुविधाओं तथा कैंपस से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रचार कर रहे थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उनका संबंध दिल्ली यूनिवर्सिटी के बुद्धिस्ट स्टडीज विभाग से है। उनके उपाध्यक्ष पद जीतने से इस बार DUSU के केंद्रीय पैनल में एक निर्दलीय उम्मीदवार की भी जगह बनी है।
इस बार DUSU चुनाव में मतदान प्रतिशत को लेकर भी खास चर्चा रही। अलग अलग रिपोर्टों में अंतिम मतदान प्रतिशत के आंकड़े में अंतर बताया गया है जबकि शुरुआती आधिकारिक रिपोर्टों में करीब 40 फीसदी मतदान दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी। मतगणना के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और दो हजार से अधिक पुलिस तथा पैरामिलिट्री जवानों की तैनाती की गई थी।
चुनाव परिणाम से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने विजय जुलूसों पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। अदालत ने चुनाव प्रचार के दौरान नियमों के उल्लंघन और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर भी सख्त रुख अपनाया था। परिणाम के बाद भी यह रोक लागू रही।
