राज्य पुलिस के अनुसार इस अवधि में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और संबंधित सेवा प्रदाताओं को कुल 453 टेकडाउन नोटिस जारी किए गए। इन नोटिसों के माध्यम से 856 आपत्तिजनक और भ्रामक यूआरएल हटाने का अनुरोध किया गया, जिनमें से 823 यूआरएल को प्लेटफॉर्म्स द्वारा पहले ही हटा दिया गया है। इसके अलावा 9 सोशल मीडिया हैंडल, आईडी और चैनलों को पूरी तरह निष्क्रिय किया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों, सार्वजनिक संस्थानों और आम नागरिकों के खिलाफ गलत जानकारी और आपत्तिजनक सामग्री साझा की जा रही थी। ऐसी पोस्ट्स से सामाजिक तनाव बढ़ने और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी, जिसके चलते विशेष निगरानी और कार्रवाई की गई।
साइबर इकाइयों की ओर से बताया गया है कि यह अभियान केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देना भी है। पुलिस लगातार ऐसे अकाउंट्स और कंटेंट पर नजर रख रही है जो अफवाह फैलाने, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने या किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक या अपुष्ट जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। इसके तहत संबंधित धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और आवश्यक होने पर गिरफ्तारी भी की जा रही है।
बिहार पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। पुलिस का कहना है कि जनता की जागरूकता और सहयोग से ही साइबर अपराधों और अफवाहों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
