नई दिल्ली ।
राष्ट्रीय राजधानी में नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन और तेज हो गया। जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर मार्च करने की कोशिश के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई स्थानों पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। इस बीच सरकार की ओर से संवाद की पहल भी सामने आई, जिससे आंदोलन के समाधान की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई।प्रदर्शनकारी प्रतिनिधियों का दावा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने उनसे मुलाकात कर उनकी बात सुनी। उनके अनुसार बातचीत की पहल सरकार की ओर से की गई थी। हालांकि बैठक में क्या चर्चा हुई और किसी सहमति पर बात बनी या नहीं, इस संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। फिर भी इस मुलाकात को आंदोलन के बीच संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उधर, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी संसद परिसर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक के एजेंडे का आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया गया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे नीट परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम और जारी विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष लगातार शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा संबंधी मामलों को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है, जिसके कारण यह मुद्दा संसद के भीतर भी प्रमुखता से उठ रहा है।
विरोध प्रदर्शन की शुरुआत पिछले महीने जंतर-मंतर पर धरने के रूप में हुई थी। समय के साथ इसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों और युवाओं की भागीदारी बढ़ती गई। आंदोलन के दौरान कुछ प्रतिनिधियों ने अनशन भी किया, जिससे इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा मिली। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च का आह्वान किया, जिसके बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि संसद मार्च के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। इसी कारण सुरक्षा एजेंसियों ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया। नई दिल्ली जिले में विशेष सतर्कता बरती गई तथा आसपास के जिलों से भी अतिरिक्त सुरक्षा बल बुलाए गए। प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की तथा झड़प की घटनाएं भी सामने आईं, हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए लगातार निगरानी बनाए रखी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार और प्रदर्शनकारी प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की शुरुआत सकारात्मक संकेत हो सकती है, लेकिन किसी ठोस समाधान तक पहुंचने के लिए दोनों पक्षों के बीच आगे भी संवाद जारी रहना आवश्यक होगा। दूसरी ओर विपक्ष इस मुद्दे को संसद में उठाकर सरकार से जवाब मांग रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विषय संसद और राजनीतिक विमर्श का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है। सरकार की अगली रणनीति और बातचीत के परिणाम पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
