कार्यकारिणी बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया जा रहा है कि बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखा जाए बल्कि उन्हें कौशल आधारित और व्यवहारिक शिक्षा भी उपलब्ध कराई जाए। बदलती तकनीक और रोजगार की जरूरतों को देखते हुए शिक्षा के ऐसे मॉडल तैयार करने पर चर्चा हो रही है जिनसे विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ साथ आवश्यक कौशल भी विकसित हो सकें। इसके साथ ही प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में नए मॉड्यूल तैयार करने पर भी मंथन किया जा रहा है।
बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी रणनीति पर चर्चा की जा रही है। शिक्षा नीति के प्रावधानों को कक्षा स्तर तक तेजी से पहुंचाने के साथ शिक्षकों को उसके अनुरूप प्रशिक्षित करने की जरूरत पर विचार किया जा रहा है। शिक्षकों की भूमिका को मजबूत बनाने और उन्हें नई शिक्षण पद्धतियों से जोड़ने को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विद्या भारती की कार्यकारिणी बैठक में शिक्षा को देश के अलग अलग क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप ढालने पर भी जोर दिया जा रहा है। जनजातीय क्षेत्रों से लेकर दूरदराज के गांवों और महानगरीय क्षेत्रों तक विद्यार्थियों की जरूरतें अलग होती हैं। ऐसे में स्थानीय परिस्थितियों संस्कृति और संसाधनों को ध्यान में रखते हुए शिक्षण मॉडल विकसित करने पर चर्चा हो रही है। उद्देश्य यह है कि क्षेत्र चाहे कोई भी हो हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
बैठक में शिक्षा के जरिए वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने की दिशा में भी विचार किया जा रहा है। शिक्षाविद् इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि विद्यार्थियों में जिम्मेदारी संवेदनशीलता और समाज के प्रति सकारात्मक सोच कैसे विकसित की जाए। भारतीय मूल्यों और आधुनिक आवश्यकताओं के बीच बेहतर संतुलन बनाने को भी शिक्षा के भविष्य के लिए अहम माना जा रहा है।
बैठक के दौरान विद्या भारती के आगामी 75वें वर्ष यानी अमृत महोत्सव की तैयारियों की रूपरेखा पर भी चर्चा हो रही है। इसी क्रम में 25 सितंबर को सुबह 11 बजे देशभर में एक साथ वंदे मातरम् के सामूहिक गायन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों शिक्षकों और समाज में राष्ट्रभावना तथा देश के प्रति श्रद्धा को मजबूत करने का संदेश दिया जाएगा। जबलपुर में चल रही यह बैठक आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था को लेकर विद्या भारती की दिशा और प्राथमिकताओं को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
