निरीक्षण के समय विद्यालय में केवल एक शिक्षक मौजूद थे। छात्रों की शून्य उपस्थिति और मिड-डे मील जैसी महत्वपूर्ण योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही देखकर तहसीलदार ने नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित शिक्षक को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएं और विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए।
दरअसल, जिला कलेक्टर अर्पित वर्मा ने हाल ही में सभी एसडीएम और तहसीलदारों को ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। इसी अभियान के तहत मंगलवार सुबह करीब 11 बजे तहसीलदार द्रगपाल सिंह बैश ने सड़ और ककरई गांव के स्कूलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य शिक्षा और पोषण योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना था।
सड़ प्राथमिक विद्यालय में मिली अव्यवस्थाओं के बाद तहसीलदार ककरई गांव पहुंचे, जहां प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय एक ही भवन में संचालित हो रहे हैं। यहां चार शिक्षक उपस्थित मिले, लेकिन छात्रों की संख्या अपेक्षा से काफी कम थी। कम उपस्थिति को लेकर तहसीलदार ने शिक्षकों से जवाब-तलब किया और बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए घर-घर संपर्क अभियान चलाने तथा अभिभावकों को जागरूक करने के निर्देश दिए।
तहसीलदार ने शिक्षकों से कहा कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण पहुंचाना है। यदि विद्यालयों में छात्र ही नहीं आएंगे तो शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निरीक्षण का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा और लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में लगातार सामने आ रही कम उपस्थिति और मिड-डे मील जैसी योजनाओं के सही क्रियान्वयन को लेकर प्रशासन अब सख्त नजर आ रहा है। जिला प्रशासन का मानना है कि नियमित निरीक्षण से न केवल व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की उपस्थिति में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।
