मामला तेजी से बढ़ा तो मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। संत समाज भी इस मुद्दे पर सामने आया और प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने के बजाय संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की गई। संतों का कहना था कि यदि प्रतिमा को हटाने की कोशिश के बाद भी वह अपनी जगह पर बनी हुई है तो इसे आस्था से जुड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। मंदिर में बटुकों की मंडली ने हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ भी किया। श्रद्धालुओं के बीच मंदिर को लेकर उत्सुकता बढ़ती गई और दर्शन करने वालों की संख्या में भी इजाफा हुआ।
इस बीच कांग्रेस भी इस मामले को लेकर मैदान में उतर आई। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भगवा ध्वज लेकर मंदिर पहुंचकर प्रतिमा को हटाए जाने की कथित योजना का विरोध किया। वहां रामधुन गाई गई और हनुमान चालीसा का पाठ कर पूजा अर्चना की गई। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर जल्दबाजी का आरोप लगाते हुए प्रतिमा को उसी स्थान पर रखने की मांग की।
अब इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से सामने आया बयान चर्चा का नया विषय बन गया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिमा को हटाने या विस्थापित करने का अभी तक कोई प्रयास नहीं किया गया है। यानी जिस प्रतिमा को हटाने की कोशिश और उसके अपनी जगह से नहीं हिलने की चर्चा पिछले दिनों से चल रही थी उस पर प्रशासन ने अलग तस्वीर पेश की है। इस बयान के बाद पूरे मामले में प्रशासन के रुख को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
मंदिर की प्रतिमा को फिलहाल टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर लंबे समय से आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर से लोगों का भावनात्मक जुड़ाव भी काफी गहरा है। चाहरदीवारी का हिस्सा हटने के बाद भी श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी हुई है।
मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू प्रतिमा की प्राचीनता से जुड़ा है। बताया गया है कि पुरातत्व विभाग प्रतिमा की उम्र और ऐतिहासिक महत्व को लेकर जांच कर रहा है। शुरुआती स्तर पर इसके करीब 1000 साल पुराने होने की संभावना जताई गई है हालांकि इसकी वास्तविक उम्र को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बड़े स्तर पर विकास कार्य चल रहे हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के साथ धार्मिक भावनाओं का सम्मान बनाए रखने की चुनौती भी है। फिलहाल संत समाज संवाद से समाधान चाहता है जबकि श्रद्धालु प्रतिमा को यथास्थान रखने की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर प्रशासन आगे क्या फैसला करता है।
