पुलिस के मुताबिक अवैध रेत खनन और परिवहन के कारोबार में वर्चस्व स्थापित करने के लिए कारोबारी राजेंद्र लोधी को रास्ते से हटाने की साजिश रची गई थी। वारदात वाले दिन आरोपियों ने राजेंद्र लोधी की हर गतिविधि पर नजर रखी। उसकी लोकेशन लगातार मुख्य आरोपी तक पहुंचाई जाती रही। जैसे ही राजेंद्र अपने साथियों के साथ तय स्थान पर पहुंचा वैसे ही पहले से हाईवे के दोनों ओर खड़े हाईवा वाहनों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया और कुचल दिया। इस हमले में राजेंद्र लोधी सहित पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया जिसका इलाज जारी है।
जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल से एक वाहन का टूटा हुआ अंग्रेजी अक्षर ए मिला जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी। इसके बाद सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और हत्या में इस्तेमाल हाईवा को हीरापुर बंदरोहा के जंगल से बरामद कर लिया गया। पूछताछ में आरोपी राजा पटेल ने पूरी साजिश का खुलासा कर दिया जिसके बाद एक के बाद एक आरोपियों की गिरफ्तारी होती चली गई।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जबलपुर स्थित एक निजी अस्पताल के संचालक डॉ अमित खरे भी इस साजिश का हिस्सा थे। आरोप है कि उन्होंने हत्या को सड़क हादसा दिखाने और सबूत मिटाने के तरीके बताए। वारदात के बाद आरोपियों के बीच हुई बातचीत में मौत की पुष्टि होने पर खुशी जताने जैसी बातें भी सामने आई हैं जो इस साजिश की गंभीरता को दर्शाती हैं।
पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल हाईवा के अलावा थार और फॉर्च्यूनर वाहन भी जब्त कर लिए हैं। शुरुआती जांच के अनुसार राजेंद्र लोधी और मुख्य आरोपी आनंद पटेल के बीच लंबे समय से अवैध रेत कारोबार और आर्थिक हितों को लेकर विवाद चल रहा था। इसी रंजिश ने खूनी रूप ले लिया और पांच लोगों की जान चली गई।
पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है। इस खुलासे के बाद अवैध रेत कारोबार से जुड़े आपराधिक गठजोड़ पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
