कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने शिवपंथ के संस्थापक परम पूज्य गुरुवर्य श्री वनसिंह महाराज को नमन किया। उन्होंने श्री कालूसिंह महाराज और सुमली माताजी के प्रयासों की भी प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मनुष्य जीवन अनमोल है और इसे नशे की प्रवृत्ति में बर्बाद करने के बजाय ऐसे कार्यों में लगाना चाहिए जिनसे जीवन सार्थक बने। आध्यात्मिकता और सत्संग के माध्यम से लोगों को सकारात्मक दिशा देने का शिवपंथ का प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायी है।
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नशामुक्त समाज बनाने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसमें परिवारों सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशामुक्त भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2029 तक नशे की बुराई को दूर करने के लक्ष्य की दिशा में सभी को मिलकर काम करना होगा। मुख्यमंत्री ने शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की धार्मिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आस्था और जनजागरण को जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस वर्ष किसान कल्याण वर्ष मना रही है। किसान और ग्रामीण परिवार गौपालन तथा दुग्ध उत्पादन के माध्यम से अपनी आय बढ़ा सकते हैं। सरकार गौशालाओं के संचालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए सहायता देगी। दूध समितियों के माध्यम से दूध बेचने पर ग्रामीणों को आमदनी का अवसर मिलेगा। उन्होंने लोगों से दूध और पौष्टिक आहार अपनाने तथा नशे से दूर रहने की अपील की।
बड़वानी प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए कई घोषणाएं भी कीं। इनमें ग्राम में खुपजदेव धाम का निर्माण और वहां तक सड़क बनाने की घोषणा शामिल है। ग्राम अजगरिया में बालक और बालिकाओं के लिए 100-100 सीटर छात्रावास बनाए जाने की बात कही गई। ग्राम पांजरिया ध में 50 लाख रुपये की लागत से सर्वसुविधायुक्त शेड बनाने तथा ग्राम धवली में पुलिस चौकी स्थापित करने की घोषणा भी की गई।
मुख्यमंत्री ने स्थानीय भाषा और जनजातीय समुदाय से जुड़े विषयों पर भी ध्यान देने की बात कही। बारेली भाषा के संरक्षण और विकास के लिए दस्तावेजों के संरक्षण तथा शोध पर काम किया जाएगा। आदिवासी क्षेत्र में सिकल सेल बीमारी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं जांच परामर्श और उपचार की व्यवस्था को मजबूत करने की घोषणा की गई। इसके साथ ही वन औषधियों के संरक्षण और शोध को बढ़ावा देने के लिए बड़वानी में वन औषधि शोध संस्थान स्थापित करने की बात कही गई।
वन अधिकार के तहत जिन जनजातीय परिवारों को अभी पट्टे नहीं मिले हैं उन्हें पट्टे देने और जिन परिवारों को पट्टे मिल चुके हैं उनकी रजिस्ट्री कराने की घोषणा भी की गई। इन घोषणाओं का उद्देश्य क्षेत्र में शिक्षा स्वास्थ्य आजीविका और आदिवासी अधिकारों से जुड़े प्रयासों को गति देना है।
शिवपंथी सत्संग संगठन लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में नशामुक्ति के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है। संगठन की मान्यता है कि आध्यात्मिकता सत्संग और अनुशासित जीवनशैली के माध्यम से व्यक्ति को नशे से दूर रहने की प्रेरणा मिल सकती है। शरद पूर्णिमा पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं पुरुष बुजुर्ग और बच्चे शामिल हुए। धार्मिक भजनों के साथ दूध प्रसादी और चावल की खिचड़ी का वितरण किया गया। कार्यक्रम में नशामुक्त समाज बनाने और क्षेत्र के विकास के लिए सामूहिक प्रयासों का संदेश दिया गया।
