जयपुर के सन सिटी नीदड़ निवासी भागचंद बलेसरा लंबे समय से भगवान महाकाल के प्रति गहरी श्रद्धा रखते हैं। इसी श्रद्धा भाव के साथ उन्होंने विशेष रूप से 1 किलो 300 ग्राम चांदी से एक सुंदर और कलात्मक छत्र तैयार करवाया। इस छत्र की अनुमानित कीमत करीब 3 लाख 25 हजार रुपए बताई जा रही है। भागचंद बलेसरा अपने पूरे परिवार के साथ उज्जैन पहुंचे और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद इस दिव्य छत्र को बाबा महाकाल को अर्पित किया।
इस धार्मिक अवसर पर उनकी धर्मपत्नी सीता देवी, पुत्र गोविंद बलेसरा और सीताराम बलेसरा, पुत्रियां ममता, सुमन और अनिता तथा पौत्र महावीर बलेसरा भी मौजूद रहे। पूरे परिवार ने बाबा महाकाल के दर्शन कर सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की।
महाकालेश्वर मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक धार्मिक विधि-विधान के साथ छत्र का पूजन कराया। इसके बाद विशेष अनुष्ठान संपन्न कर यह चांदी का छत्र भगवान महाकाल के मुखमंडल पर धारण कराया गया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने इस दिव्य क्षण को श्रद्धा और भक्ति के साथ देखा। पूजा के दौरान वातावरण हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।
छत्र अर्पण के बाद मंदिर समिति की ओर से भागचंद बलेसरा और उनके परिवार का सम्मान भी किया गया। श्रद्धालु परिवार ने इसे अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से उन्हें जीवन में अनेक उपलब्धियां और खुशियां मिली हैं। इसी कृतज्ञता और आस्था के भाव से उन्होंने यह विशेष भेंट समर्पित की है।
महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा सोने-चांदी के आभूषण, मुकुट, छत्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने की परंपरा वर्षों पुरानी है। देश और विदेश से आने वाले भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान को बहुमूल्य उपहार भेंट करते हैं। विशेष बात यह है कि सोने और चांदी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने के बावजूद धार्मिक दान और भेंट की भावना में कोई कमी नहीं आई है।
महाकालेश्वर मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां प्रतिदिन हजारों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। जयपुर से आए इस श्रद्धालु परिवार द्वारा अर्पित किया गया चांदी का छत्र भी इसी अटूट विश्वास और भक्ति का प्रतीक बनकर सामने आया है।
