भोपाल । लंबे इंतजार के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने चार महत्वपूर्ण आयोगों में अध्यक्ष पदों पर नियुक्तियां कर दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की स्वीकृति के बाद इन पदों पर नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इसे सामाजिक न्याय और कल्याण से जुड़े तंत्र को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
राज्य के ये चारों आयोग समाज के अलग-अलग संवेदनशील वर्गों से जुड़े हैं, जिनमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। एक साथ सभी आयोगों में नेतृत्व तय होना प्रशासनिक दृष्टि से बड़ा निर्णय माना जा रहा है।
अनुसूचित जाति आयोग
अनुसूचित जाति आयोग की कमान कैलाश जाटव को सौंपी गई है। उनकी नियुक्ति 23 अप्रैल 2026 को जारी आदेश के तहत अनुसूचित जाति आयोग अधिनियम 1995 की धारा 3 के अंतर्गत की गई है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से तीन वर्ष की अवधि के लिए लागू होगी। आयोग में रामलाल मालवीय और बारेलाल अहिरवार को सदस्य बनाया गया है, जबकि अनुसूचित जाति विकास विभाग के आयुक्त या संचालक पदेन सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।
महिला आयोग
महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में रेखा यादव को जिम्मेदारी दी गई है। यह आयोग महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनसे जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए कार्य करता है। नई नियुक्ति से आयोग की सक्रियता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है, खासकर घरेलू हिंसा और कार्यस्थल पर उत्पीड़न जैसे मामलों में।
अनुसूचित जनजाति आयोग
अनुसूचित जनजाति आयोग का नेतृत्व अब रामलाल रौतेल करेंगे। उनके साथ भगत नेताम और मंगल सिंह धुर्वे को सदस्य नियुक्त किया गया है। राज्य में बड़ी आदिवासी आबादी को देखते हुए इस आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है, और नई टीम से जनजातीय क्षेत्रों में कामकाज तेज होने की संभावना है।
बाल अधिकार संरक्षण आयोग
वहीं, बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष के रूप में डॉ. निवेदिता शर्मा को नियुक्त किया गया है। यह आयोग बाल श्रम, बाल विवाह और बच्चों से जुड़े अपराधों पर नजर रखने के साथ उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य करता है। उनकी नियुक्ति से आयोग को मजबूत नेतृत्व मिलने की उम्मीद है।
राजनीतिक दृष्टि से भी इन नियुक्तियों को अहम माना जा रहा है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद अब 2028 के चुनावी परिदृश्य को देखते हुए सरकार द्वारा इन आयोगों को सशक्त बनाने की रणनीति के रूप में भी इस फैसले को देखा जा रहा है।
