मंदिर प्रबंधन के अनुसार पहले चरण में गर्भगृह के प्रवेश द्वार की चौड़ाई बढ़ाई जाएगी। इसके लिए द्वार पर लगी लगभग 150 किलोग्राम चांदी को पहले ही सुरक्षित रूप से हटाकर ट्रेजरी में जमा करा दिया गया है। इसके बाद संरचना की तकनीकी जांच कराई गई, जिसकी रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद निर्माण कार्य की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया है। रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए चरणबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा।
मंदिर के पुजारी पंडित अशोक भट्ट के अनुसार मास्टर प्लान मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा जिला प्रशासन और नगर निगम के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है। पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 25 से 30 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है, जबकि पहले चरण के कार्यों पर 8 से 10 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। निर्माण कार्य के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी और दर्शन व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए अधिकांश कार्य रात के समय किए जाएंगे।
मास्टर प्लान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मंदिर के सामने स्थित सभा मंडप में बदलाव है। वर्तमान व्यवस्था में आगे खड़े श्रद्धालुओं के कारण पीछे मौजूद लोगों को भगवान के दर्शन करने में कठिनाई होती है। इसे ध्यान में रखते हुए सभा मंडप को लगभग दो से ढाई फीट नीचे किया जाएगा। इससे लंबी कतार में खड़े श्रद्धालुओं को भी सीधे और सहज रूप से भगवान गणेश के दर्शन हो सकेंगे। साथ ही विशेष अवसरों पर आने वाले अतिथियों और नवविवाहित दंपतियों के लिए भी दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम बनेगी।
योजना के तहत मंदिर परिसर में दो मंजिला दर्शन कॉरिडोर का निर्माण भी किया जाएगा। इस कॉरिडोर में व्यवस्थित रेलिंग और कतार प्रबंधन की आधुनिक व्यवस्था होगी, जिससे एक साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु आसानी से दर्शन कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त स्टेप दर्शन व्यवस्था भी विकसित की जाएगी ताकि किसी भी स्थान पर भीड़ का दबाव न बने और श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव प्राप्त हो।
मंदिर परिसर के समग्र विकास के लिए कई अन्य सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं। इनमें पार्किंग क्षेत्र का विस्तार, पार्किंग तक पहुंचने के लिए रोटरी निर्माण, नई गाड़ियों की पूजा के लिए अलग व्यवस्था, प्रसाद दुकानों के ऊपर शेड, बच्चों के लिए खेल क्षेत्र, श्रद्धालुओं के लिए सुविधा केंद्र तथा हरित क्षेत्र विकसित करने के लिए वृक्षारोपण शामिल हैं।
मंदिर परिसर में स्थित 33 छोटे मंदिरों में से कुछ मंदिरों को भी व्यवस्थित तरीके से पुनर्स्थापित किया जाएगा। प्रबंधन का कहना है कि कुछ मंदिरों में झुकाव की स्थिति देखी गई है, इसलिए उनकी संरचनात्मक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया जाएगा। इसके अलावा वैदशाला और यज्ञशाला जैसी धार्मिक एवं सांस्कृतिक सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा।
मंदिर प्रबंधन का मानना है कि खजराना गणेश मंदिर एक प्राचीन और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है, जिसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और बदलती जरूरतों को देखते हुए यह मास्टर प्लान भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके पूरा होने के बाद मंदिर परिसर न केवल अधिक सुव्यवस्थित होगा, बल्कि श्रद्धालुओं को भी पहले से बेहतर और सुविधाजनक दर्शन अनुभव प्राप्त होगा।
