शराब दुकान संचालक का आरोप है कि पिछले करीब तीन वर्षों से अलग अलग मौकों पर प्रतिमाह 20 हजार रुपए दिए जाते थे। शिकायत के मुताबिक अब तीनों दुकानों के लिए अलग अलग 20 हजार रुपए मांगे गए जिससे कुल रकम 60 हजार रुपए हो जाती है। संचालक का कहना है कि जब उन्होंने यह रकम देने से इनकार किया तो अभिषेक पाठक अपने साथियों के साथ शराब दुकान के सामने पहुंच गए और धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान दुकानों से अवैध और नकली शराब बिक्री किए जाने जैसे आरोप भी लगाए गए।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि रकम नहीं देने पर दुकान बंद कराने और कारोबार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई। इसी विवाद के बीच सोशल मीडिया पर एक कथित AI वीडियो भी वायरल होने की बात सामने आई है। दुकान संचालक का आरोप है कि रकम की मांग पूरी नहीं होने पर शराब की गलत बिक्री से जुड़ा आरोप लगाते हुए यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। पुलिस अब वीडियो के स्रोत और उसकी वास्तविकता की जांच करेगी।
मामले में करीब एक मिनट 32 सेकेंड का एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस ऑडियो में प्रति दुकान 20 हजार रुपए की रकम को लेकर बातचीत सुनाई देती है। इसमें 40 हजार रुपए भेजने और बाकी रकम बाद में देने की बात होने का भी दावा किया जा रहा है। हालांकि ऑडियो असली है या उसमें किसी तरह की काट छांट या एडिटिंग की गई है इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
वहीं कांग्रेस नेता अभिषेक पाठक ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वायरल ऑडियो को काट छांटकर पेश किया गया है। पाठक के मुताबिक ऑडियो में 40 हजार रुपए की जो चर्चा है वह शराब दुकान के किराए को लेकर थी और इसका किसी तरह की अवैध वसूली से संबंध नहीं है। उन्होंने दावा किया कि दुकान संचालक किराए की पूरी रकम नहीं दे रहे थे और इसी को लेकर बातचीत हुई थी।
पुलिस ने अभिषेक पाठक के खिलाफ BNS की धारा 308(2) और 351(2) के तहत FIR दर्ज की है। FIR में घटना की अवधि 25 अप्रैल से 22 सितंबर 2026 तक बताई गई है। अब पुलिस शिकायतकर्ता के बयान के साथ कथित ऑडियो और वीडियो तथा दूसरे डिजिटल साक्ष्यों की जांच करेगी। फिलहाल FIR दर्ज होना आरोपों के साबित होने के बराबर नहीं है। मामले में आरोपों की वास्तविकता और घटनाक्रम से जुड़े तथ्य पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
