महापौर पार्श्वनाथ विनय नगर जैन कॉलोनी और लोकमान्य नगर सहित कई इलाकों में पहुंचे। यहां उन्होंने रहवासियों से बातचीत कर पानी के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि गर्मी के दिनों में पानी की जरूरत बढ़ जाती है और ऐसे समय में पानी की बर्बादी पूरे शहर के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। पानी की कमी का असर आखिरकार शहर के लोगों पर ही पड़ता है। इसलिए हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पानी का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके भी बड़ी मात्रा में पानी बचाया जा सकता है।
पहले समझाइश फिर होगी चालानी कार्रवाई
नगर निगम की योजना के मुताबिक पानी की बर्बादी करते पाए जाने वाले लोगों को शुरुआत में दो से तीन बार समझाया जाएगा। इसके लिए अभियान से जुड़ी एनजीओ की टीम को भी निर्देश दिए गए हैं। यदि बार-बार समझाने के बाद भी कोई व्यक्ति पानी व्यर्थ बहाता है तो उसकी गतिविधि का वीडियो बनाया जाएगा और नियमों के अनुसार चालान काटने की कार्रवाई की जाएगी। इस अभियान का उद्देश्य केवल जुर्माना लगाना नहीं बल्कि लोगों को पानी बचाने के प्रति जिम्मेदार बनाना भी है। निगम चाहता है कि लोग कार्रवाई के डर से ही नहीं बल्कि पानी की अहमियत समझकर भी इसकी बर्बादी रोकें।
आरओ के बचे हुए पानी को फेंकने से बचें
महापौर ने घरों में इस्तेमाल होने वाले आरओ से निकलने वाले अतिरिक्त पानी को भी उपयोगी बनाने की सलाह दी। आमतौर पर कई घरों में आरओ से निकलने वाला पानी बिना इस्तेमाल किए नाली में बहा दिया जाता है। जबकि इस पानी का उपयोग कई दूसरे कामों में किया जा सकता है। इसे पौधों में डालने गाड़ी धोने और कपड़े धोने जैसे कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि पानी की गुणवत्ता के अनुसार ही उसका उपयोग करना चाहिए। इस तरह पीने योग्य पानी को गैरजरूरी कामों में खर्च होने से बचाया जा सकता है।
दीपावली तक होगी निगरानी
नगर निगम ने इस अभियान को दीपावली तक नियमित रूप से चलाने की तैयारी की है। महापौर ने एनजीओ की टीम को अभियान का कार्यक्रम तैयार कर लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा जिन स्थानों पर हरी घास दिखाई दे रही है वहां भी दो-दो दिन की समय-सीमा तय कर घास की कटाई कराने को कहा गया है। अभियान के दौरान जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू पार्षद योगेश गेदर और निगम के जोनल अधिकारी भी मौजूद रहे।
इंदौर में पानी की बर्बादी रोकने की यह पहल ऐसे समय में की जा रही है जब भविष्य में जल संकट से बचने के लिए पानी का सही इस्तेमाल बेहद जरूरी है। यदि नागरिक घरों में नल खुला छोड़ने से बचें आरओ के अतिरिक्त पानी का दोबारा उपयोग करें और जरूरत के अनुसार ही पानी खर्च करें तो काफी हद तक बर्बादी रोकी जा सकती है। अब देखना होगा कि जागरूकता और निगरानी का यह अभियान शहर में पानी बचाने की आदत को कितना मजबूत बना पाता है।
