जैन परिवार ने विवाह में शामिल होने वाले सभी मेहमानों से विशेष आग्रह किया है कि वे किसी भी प्रकार का उपहार लिफाफा या भेंट लेकर न आएं। परिवार का कहना है कि नवदंपती के लिए सबसे बड़ा उपहार बड़ों का आशीर्वाद और अपने लोगों का स्नेह ही है। इसलिए किसी भी तरह की भौतिक भेंट की आवश्यकता नहीं है।
इसके साथ ही परिवार ने एक अनूठी अपील भी की है। सभी मेहमानों से कहा गया है कि वे नवदंपती को आशीर्वाद देने के लिए अपने घर आंगन खेत या आसपास किसी भी उपयुक्त स्थान पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी नियमित देखभाल का संकल्प भी लें। उनका मानना है कि यदि हर शुभ अवसर को प्रकृति से जोड़ दिया जाए तो समाज में पर्यावरण संरक्षण को लेकर नई जागरूकता पैदा होगी और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ तथा हराभरा वातावरण मिल सकेगा।
अक्षय जैन का कहना है कि इस निर्णय के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा समय समय पर दिए गए सादगी मितव्ययता और पर्यावरण संरक्षण के संदेशों से प्रेरणा मिली है। उनका मानना है कि विवाह जैसे सामाजिक आयोजनों में अनावश्यक खर्च के बजाय समाज और प्रकृति के हित में सकारात्मक पहल की जानी चाहिए ताकि ऐसे आयोजन दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकें।
विवाह समारोह पूरी तरह जैन परंपराओं के अनुसार आयोजित किया जाएगा। सभी धार्मिक अनुष्ठान नवकार महामंत्र और मंगलाचरण के बीच संपन्न होंगे। जैन धर्म की परंपरा का पालन करते हुए किसी भी प्रकार का रात्रिकालीन कार्यक्रम नहीं रखा गया है। विवाह से जुड़ी सभी रस्में दिन के समय पूरी की जाएंगी। मेहमानों के लिए जमीकंद रहित सात्विक भोजन की व्यवस्था भी की गई है।
सामाजिक संगठनों और शहर के कई लोगों ने इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि आज जब शादियां अक्सर दिखावे और प्रतिस्पर्धा का माध्यम बनती जा रही हैं तब इस तरह का आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला प्रयास है। यदि अधिक से अधिक परिवार इस सोच को अपनाएं तो विवाह समारोह केवल खुशियों का अवसर ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का माध्यम भी बन सकते हैं। इंदौर का यह विवाह सादगी संस्कार और हरियाली का संदेश देकर समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनने जा रहा है।
