यह मामला मार्च 2023 में सामने आया था जब तत्कालीन संयुक्त कलेक्टर मुनीष सिंह सिकरवार की शिकायत के आधार पर रावजी बाजार थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने मिलाप चौहान रंजीत करोड़ मनीषा चौहान राहुल चौहान सहित कई लोगों को आरोपी बनाया था। इसके बाद लगातार जांच का दायरा बढ़ता गया और कई अहम जानकारियां सामने आईं।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के बैंक खातों से जुड़ी जानकारी का दुरुपयोग किया। जिन खातों में तकनीकी कारणों से भुगतान नहीं हो पाया था उन खातों की जानकारी हासिल कर आरोपियों ने फर्जी स्वीकृति आदेश तैयार किए। इसके बाद वास्तविक हितग्राहियों के बैंक खातों की जगह अपने परिजनों दोस्तों और परिचितों के बैंक खातों की जानकारी दर्ज कर दी गई। इसी फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी राशि दोबारा जनरेट कर अलग-अलग निजी खातों में ट्रांसफर की जाती रही।
जांच एजेंसियों के अनुसार इसी तरीके से लगभग 8 करोड़ रुपए की शासकीय राशि का गबन किया गया। यह मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की थी। अब तक कई आरोपियों की भूमिका सामने आ चुकी है और लगातार नए तथ्य भी उजागर हो रहे हैं।
इसी कड़ी में पुलिस ने सोमवार को सर्वहारा नगर परदेशीपुरा निवासी मनोज उर्फ हल्लू को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि सह आरोपी रंजीत करोड़ ने सरकारी मद से मनोज के बैंक खाते में 13 लाख 72 हजार रुपए ट्रांसफर किए थे। पुलिस का दावा है कि इस रकम का उपयोग आरोपी और उसके सहयोगियों ने विभिन्न कार्यों में किया। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस राशि का कितना हिस्सा निकाला गया कितना खर्च हुआ और क्या इसे आगे अन्य खातों में भी भेजा गया।
पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में इस पूरे घोटाले से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि सरकारी धन के गबन की इस साजिश में किसकी क्या भूमिका थी और किन लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने तथा बैंक खातों में राशि ट्रांसफर कराने में मदद की।
यह मामला सरकारी वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रशासन का कहना है कि पूरे प्रकरण की गहन जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का उद्देश्य केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है बल्कि गबन की पूरी राशि का हिसाब जुटाना और सरकारी धन की रिकवरी सुनिश्चित करना भी है।
