कलेक्टोरेट के सामने बना यह बड़ा प्रवेश द्वार ऐसे स्थान पर स्थित है जहां से रोजाना कलेक्टर सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी गुजरते हैं। इसके बावजूद अब तक इसे हटाने की कोई कार्रवाई नहीं होना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी कार्यालयों के सामने ही नियमों का पालन नहीं होगा तो शहरभर में अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
नगर निगम की ओर से दावा किया गया है कि शहरभर से अब तक करीब एक हजार अवैध बैनर पोस्टर हटाए जा चुके हैं और अभियान लगातार जारी है। बुधवार को भी कई इलाकों में कार्रवाई कर अवैध पोस्टर और बैनर हटाए गए। हालांकि शहर के कई प्रमुख मार्गों पर अब भी बड़ी संख्या में राजनीतिक धार्मिक और सामाजिक आयोजनों से जुड़े पोस्टर और होर्डिंग्स लगे हुए दिखाई दिए।
एबी रोड और एमजी रोड जैसे व्यस्त मार्गों पर भी यूनीपोल मिनी पोल और लॉलीपॉप पोल पर बड़ी संख्या में बैनर पोस्टर लगे मिले। इनमें राजनीतिक कार्यक्रमों धार्मिक आयोजनों और सामाजिक गतिविधियों के प्रचार संबंधी सामग्री शामिल थी। बताया जा रहा है कि इनमें से कई होर्डिंग्स के लिए नगर निगम में निर्धारित शुल्क भी जमा नहीं कराया गया है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब शहरभर में अवैध होर्डिंग्स हटाने का अभियान चलाया जा रहा है तो सरकारी कार्यालयों के बाहर लगे बैनर पोस्टरों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। कलेक्टोरेट जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र के बाहर अवैध प्रवेश द्वार और पोस्टरों का बने रहना अभियान की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है।
शहर के विभिन्न इलाकों में भी हालात लगभग एक जैसे हैं। कई स्थानों पर धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के बैनर अब भी सार्वजनिक स्थलों पर लगे हुए हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि हाईकोर्ट के आदेश का पूरी गंभीरता से पालन कराया जाए तो अभियान की शुरुआत सबसे पहले सरकारी परिसरों और प्रमुख प्रशासनिक भवनों के बाहर से होनी चाहिए।
अब लोगों की नजरें नगर निगम और जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी सरकारी परिसरों के बाहर लगे अवैध होर्डिंग्स और प्रवेश द्वारों पर भी समान रूप से कार्रवाई करते हैं या फिर अभियान केवल चुनिंदा स्थानों तक ही सीमित रह जाता है।
