मामला मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के रघुराजनगर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। आरोप है कि मोतीलाल कुशवाहा को स्कूल के पास रोककर उनके साथ मारपीट की गई थी। इस मामले में शालिग्राम उर्फ छोटे सरकार पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने गाली-गलौज की और साथ मौजूद सह-आरोपियों को हमला करने के लिए उकसाया।
मामले में मोतीलाल कुशवाहा के पेट में गोली लगने का भी आरोप है। घटना के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई। शालिग्राम की ओर से इन आरोपों का विरोध किया गया था। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताते हुए कहा था कि राजनीतिक दबाव और पुरानी रंजिश के कारण उन्हें इस मामले में फंसाया गया है।
बचाव पक्ष की ओर से अदालत में घटना से संबंधित मोबाइल वीडियो होने की बात भी रखी गई। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1), 296(B), 351(3) और 3(5) के साथ आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था।
शालिग्राम उर्फ छोटे सरकार को 15 जुलाई 2026 से जेल में रखा गया है। इससे पहले जिला अदालत में जमानत के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन वहां से जमानत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की शरण ली।
जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की पीठ में जमानत याचिका पर 10 सितंबर को सुनवाई हुई थी। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सामने रखी गईं, जिसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने जमानत याचिका मंजूर करते हुए 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर सशर्त रिहाई का आदेश दिया है।
इस मामले में शालिग्राम पर मुख्य आरोप सह-आरोपियों को हमला करने के लिए उकसाने और घटना से जुड़े होने को लेकर लगाए गए हैं। वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपों से इनकार करते हुए राजनीतिक दबाव और पुरानी रंजिश का हवाला दिया है। अदालत के समक्ष घटना से संबंधित मोबाइल वीडियो होने की बात भी रखी गई थी।
जिला अदालत से जमानत नहीं मिलने के बाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद अब शालिग्राम को राहत मिली है। अदालत के आदेश के अनुसार निजी मुचलका और निर्धारित शर्तों के आधार पर उनकी जेल से रिहाई हो सकेगी। वह 15 जुलाई से न्यायिक हिरासत में थे और जमानत मिलने के बाद करीब दो महीने बाद बाहर आएंगे।
