दरअसल 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल नगर निगम ने रहवासी इलाकों में संचालित हो रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जानकारी जुटाकर कार्रवाई शुरू की थी। निगम की सूची में करीब 62 हजार 500 प्रतिष्ठान शामिल बताए गए हैं। इसके बाद करीब 15 दिनों तक संबंधित प्रतिष्ठानों को नोटिस देने की प्रक्रिया चली। इस दौरान 8084 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए। नोटिस के बाद निगम ने कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए तीन दिनों में 190 प्रतिष्ठानों को बंद भी किया था।
निगम की इस कार्रवाई के बाद शहर के व्यापारी संगठनों में नाराजगी देखने को मिली। कारोबारियों ने नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई के विरोध में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। विरोध बढ़ने के बाद नगर निगम ने कार्रवाई रोक दी। पिछले करीब 22 दिनों से इस मामले में सीलिंग या बंद करने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है। अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकता है कि आगे नगर निगम को किस तरह की कार्रवाई करनी होगी और प्रभावित प्रतिष्ठानों को लेकर क्या व्यवस्था लागू होगी।
मामले में रहवासियों की ओर से भी नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने निगम की एक्शन टेकन रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि निगम की ओर से प्रस्तुत की गई कार्रवाई की जानकारी वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती। उनके मुताबिक कुछ ऐसे प्रतिष्ठान भी हैं जिन्हें सील किए जाने का दावा किया गया था लेकिन बाद में वे दोबारा खुल गए। रहवासी पक्ष ने इस संबंध में दस्तावेज और अन्य साक्ष्य सुप्रीम कोर्ट के सामने रखने की तैयारी की है।
सोमवार को नगर निगम के अधिकारी दिनभर सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाने वाली रिपोर्ट तैयार करने में जुटे रहे। अधिकारियों ने अब तक की कार्रवाई और नोटिस से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित किया। दूसरी ओर रहवासी पक्ष भी अपने दस्तावेज तैयार करता रहा। बताया जा रहा है कि कुछ मामलों में प्रतिष्ठानों के दोबारा खुलने से संबंधित फोटो और वीडियो भी अदालत के सामने रखे जा सकते हैं।
इस पूरे मामले का असर भोपाल के हजारों कारोबारियों और रहवासी इलाकों में रहने वाले लोगों पर पड़ सकता है। व्यापारियों की नजर इस बात पर है कि अदालत की सुनवाई के बाद कार्रवाई को लेकर क्या दिशा तय होती है जबकि रहवासी पक्ष यह चाहता है कि आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के संबंध में नियमों का पालन सुनिश्चित हो। अब मंगलवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के रुख से आगे की कार्रवाई की तस्वीर काफी हद तक साफ होने की उम्मीद है।
