आयोजकों के अनुसार आंदोलन का उद्देश्य केवल दिल्ली की घटना का विरोध करना नहीं बल्कि युवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को सरकार के सामने मजबूती से उठाना भी है। प्रदर्शन के दौरान बढ़ती बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं, परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताएं, मध्यप्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों से जुड़े कथित फर्जीवाड़े, सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने का विरोध तथा विभिन्न विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों पर भर्ती की मांग प्रमुख रूप से उठाई जाएगी। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी प्रदर्शन का प्रमुख हिस्सा रहेगी।
आयोजकों का कहना है कि प्रदेश के कई जिलों से बड़ी संख्या में छात्र और युवा भोपाल पहुंच रहे हैं। उनका दावा है कि आंदोलन में हजारों प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। इसके लिए विभिन्न जिलों में पहले से तैयारियां की गई थीं और बड़ी संख्या में छात्र संगठनों ने समर्थन देने की घोषणा भी की है।
दूसरी ओर संभावित भीड़ और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए भोपाल पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। नीलम पार्क और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रदर्शन स्थल के चारों ओर बैरिकेडिंग की गई है तथा यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त बल और आवश्यक संसाधन उपलब्ध रखे गए हैं।
प्रशासन की ओर से प्रदर्शन पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि कानून व्यवस्था प्रभावित न हो। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से भी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की है। वहीं आयोजकों का कहना है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
हाल के दिनों में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और रोजगार के मुद्दों को लेकर युवाओं में असंतोष लगातार बढ़ा है। ऐसे में भोपाल में होने वाला यह राज्यव्यापी प्रदर्शन प्रदेश की राजनीति और छात्र आंदोलनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि आंदोलन के बाद सरकार की ओर से इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
