जांच एजेंसियों के अनुसार, फराज को राजधानी भोपाल के काजी कैंप इलाके से हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उसकी निशानदेही पर सहारनपुर निवासी नईम अब्दुल्ला को उत्तर प्रदेश के देवबंद क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने के बाद 16 जून तक रिमांड पर भेजा गया है, ताकि उनसे विस्तृत पूछताछ की जा सके।
एटीएस का कहना है कि आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त कर लिए गए हैं। इनकी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है, जिससे उनके संपर्कों, चैट रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और कथित नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि आरोपी किन-किन ऑनलाइन समूहों से जुड़े हुए थे और उनकी गतिविधियों का दायरा कितना व्यापक था।
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रियता के संकेत मिले हैं। हालांकि जांच एजेंसियां अभी इन जानकारियों का सत्यापन कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी रिपोर्टों का विश्लेषण किया जाएगा।
फराज के बारे में जानकारी मिली है कि वह स्थानीय स्तर पर एक क्लीनिक में काम करता था और बैटरी रिपेयरिंग का कार्य भी करता था। जांच में यह भी सामने आया है कि उसने देवबंद में धार्मिक शिक्षा प्राप्त की थी, जहां उसकी मुलाकात नईम अब्दुल्ला से हुई थी। एजेंसियां दोनों के बीच संबंधों और संपर्कों की प्रकृति को समझने की कोशिश कर रही हैं।
एटीएस ने अदालत को बताया है कि मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों से प्राप्त जानकारी की फोरेंसिक जांच बेहद महत्वपूर्ण होगी। जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि इससे आरोपियों के संपर्कों और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों के बारे में जानकारी सामने आ सकती है।
इस बीच जांच एजेंसियां बैंकिंग रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी प्रकार की संदिग्ध फंडिंग या वित्तीय गतिविधि के प्रमाण मिलते हैं तो उस दिशा में भी विस्तृत जांच की जाएगी। हालांकि अभी तक किसी भी वित्तीय कनेक्शन को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
गिरफ्तारी के बाद फराज के निवास और उसके कार्यस्थल पर भी सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय स्तर पर उसके परिचितों और संपर्कों से भी पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि उसके सामाजिक और डिजिटल संपर्कों का दायरा कितना बड़ा था तथा क्या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका भी सामने आती है।
अधिकारियों का कहना है कि मामला संवेदनशील है और जांच जारी है। इसलिए फिलहाल उपलब्ध सूचनाओं को आरोपों और जांच के दायरे में ही देखा जाना चाहिए। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और संबंधित साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही सामने आएंगे।
