जानकारी के अनुसार, व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई के प्रभाव, संभावित जोखिम और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी क्रम में अभियान को कुछ समय के लिए रोकने का फैसला किया गया।
बताया गया कि अमेरिकी सेना ने लगभग दो सप्ताह तक लगातार रात के समय सैन्य अभियान चलाया था। इसके बाद रक्षा प्रतिष्ठान की ओर से संकेत मिला कि फिलहाल सभी अभियान ‘होल्ड’ पर रखे गए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह निर्णय स्थायी है या परिस्थितियों के अनुसार भविष्य में इसमें बदलाव किया जा सकता है।
बैठक के दौरान जनरल डैन केन ने विशेष रूप से सैन्य हथियारों के भंडार और लंबे समय तक अभियान जारी रहने के संभावित प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने उपलब्ध सैन्य विकल्पों की प्रभावशीलता पर विश्वास जताते हुए यह भी कहा कि किसी भी आगे की कार्रवाई से पहले उसके व्यापक परिणामों का गंभीरता से आकलन किया जाना आवश्यक है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के बाद ही सैन्य अभियान को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया गया।
सूत्रों के अनुसार, हथियारों के भंडार की स्थिति बैठक में उठाए गए कई महत्वपूर्ण विषयों में से एक थी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यही कारण अंतिम निर्णय का आधार बना या फिर क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका और अन्य रणनीतिक कारकों ने भी इसमें भूमिका निभाई। अमेरिकी प्रशासन ने इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अमेरिका अब भी कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देता है। प्रशासन का कहना है कि यदि ईरान क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियां जारी रखता है या अपने सहयोगियों के माध्यम से सुरक्षा चुनौतियां उत्पन्न करता है, तो अमेरिका के पास सभी विकल्प उपलब्ध रहेंगे। साथ ही यह भी संकेत दिया गया कि प्रतिबंधों और सैन्य दबाव के बाद ईरान के लिए बातचीत का रास्ता अपनाना अधिक व्यावहारिक होगा।
बैठक के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिकी अधिकारी ईरान के साथ संपर्क बनाए हुए हैं और विभिन्न स्तरों पर संवाद जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य की रणनीति परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। यदि आवश्यक हुआ तो सैन्य अभियान दोबारा शुरू किया जा सकता है या उसकी तीव्रता भी बढ़ाई जा सकती है। उनके अनुसार, मौजूदा बातचीत में ईरान पहले की तुलना में अधिक गंभीर रुख अपनाता दिखाई दे रहा है।
अमेरिका के इस कदम को पश्चिम एशिया की बदलती सुरक्षा स्थिति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि कूटनीतिक प्रयास कितने सफल होते हैं और आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है या सैन्य गतिविधियां फिर से तेज होती हैं। ऐसे में क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा पर इस घटनाक्रम का प्रभाव लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
