वाशिंगटन। होर्मुज (Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान (America and Iran) में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। पिछले चार दिनों से दक्षिणी तटीय इलाकों में धमाके हो रहे हैं। वहीं ईरान ने भी अमेरिका के सहयोगी खाड़ी देशों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बंदर अब्बास, केश्म, मूसा और चाबहार जैसी पोर्ट सिटी में भी धमाके की आवाजें सुनी जा रही हैं। दो सप्ताह पहले किया गया समझौता और सीजफायर एक तरह से खटाई में पड़ गया है।
इस बार लड़ाई होर्मुज को लेकर है। ईरान ने होर्मुज के अंदर एक अलग रास्ता बना दिया है और उसका कहना है कि इसी रास्ते से जहाजों को उसके नियंत्रण में गुजरना है। जबकि अमेरिका एक अलग कॉरिडोर चलाने के प्रयास में है। ऐसे में लड़ाई होर्मुज के अंदर अलग-अलगर रास्तों को लेकर है।
अमेरिका ने दिया 24 घंटे का अल्टिमेटम
अमेरिका के सुझाए रास्ते से जब जहाज गुजरते हैं तो ईरान उनपर हमला कर देता है। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान को धमकी देते हुए कहा है कि होर्मुज को सार्वजनिक तौर पर खुला हुआ डिक्लेयर कर दिया जाए। अगर 24 घंटे के अंदर ऐसा नहीं किया गया तो बहुत बुरा होने वाला है। बता दें कि होर्मुज के रास्ते से ही दुनियाभर के तेल का पांचवां हिस्सा सप्लाई होता है। 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के बाद समझौता होने तक इस रास्ते में हजारों जहाज फंसे रहे और पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा हो गया।
अमेरिका ने कहा कि ईरान को यह संदेश क्षेत्रीय मध्यस्थों के जरिए भेज दिया गया है। ऐक्सियस की रिपोर्ट के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान सार्वजनिक तौर पर ऐलान करे कि होर्मुज सबके लिए खुला है। इसके अलावा ईरान कसम खा ले कि वह किसी भी कमर्शियल शिप को निशाना नहीं बनाएगा। अमेरिका अधिकारियों ने कहा, ट्रंप यही चाहते हैं कि होर्मुज के सारे शिपिंग चैनल बिना किसी शुल्क के खोल दिए जाएं।
अमेरिका ने कहा कि ईरान पिछले सप्ताह हुए समझौते का उल्लंघन कर रहा है। शनिवार को ओमान और ईरान के अधिकारी मस्कट में मुलाकात कर सकते हैं। अमेरिका के अधिकारी भी बैठक में शामिल हो सकते हैं। एक दिन पहले डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान ने उनसे बात करने का अनुरोध किया था और वह बात करने के लिए सहमत हो गए हैं।
ट्रंप का यह बयान अमेरिकी वायुसेना के ईरान के प्रमुख ठिकानों पर कुछ दिन पहले की गई भीषण बमबारी के बाद आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरान के पश्चिमी हिस्से में स्थित महत्वपूर्ण बिजली उपकरण निर्माण संयंत्रों, बड़े बिजली घरों और खारे पानी को मीठा बनाने वाले तटीय बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया। तब अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया था कि इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की उस आर्थिक और तकनीकी क्षमता को पंगु बनाना है जिसका उपयोग सैन्य गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है।
