राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि बुखारेस्ट पहुंचने पर जिस तरह भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिली उससे ऐसा महसूस हुआ मानो वह किसी विदेशी देश में नहीं बल्कि भारत के ही किसी सांस्कृतिक कार्यक्रम में मौजूद हों। उन्होंने विशेष रूप से उन बच्चों और युवाओं की प्रशंसा की जिन्होंने भारतीय पारंपरिक परिधान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह भारतीय समुदाय की एकजुटता और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि आज भारतीय आईटी इंजीनियर वैज्ञानिक शोधकर्ता स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञ और विद्यार्थी बड़ी संख्या में रोमानिया में अपनी पहचान बना रहे हैं। उनका ज्ञान अनुभव और पेशेवर योगदान रोमानिया की अर्थव्यवस्था और समाज को नई दिशा देने में मदद कर रहा है। साथ ही उनकी उपलब्धियां भारत की सकारात्मक छवि को भी वैश्विक स्तर पर मजबूत कर रही हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीय वास्तव में भारत के सांस्कृतिक और सामाजिक राजदूत हैं जो दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को और मजबूत बनाते हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु ने विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत एक समृद्ध आधुनिक आत्मनिर्भर और समावेशी राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने प्रवासी भारतीयों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि चाहे भारतीय दुनिया के किसी भी हिस्से में रहते हों उनका अनुभव नवाचार और उपलब्धियां भारत की प्रगति को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय समुदाय भविष्य में भी भारत और रोमानिया के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम योगदान देगा।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने रोमानिया की सरकार और वहां की जनता का भी आभार व्यक्त किया जिन्होंने भारतीय समुदाय का खुले दिल से स्वागत किया और उन्हें सुरक्षित तथा सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में व्यापार शिक्षा विज्ञान प्रौद्योगिकी स्वास्थ्य और सांस्कृतिक आदान प्रदान जैसे अनेक क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करेगा।
इससे पहले बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत और रोमानिया के शैक्षणिक संस्थानों के बीच संयुक्त शोध छात्र और शिक्षक आदान प्रदान तथा नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता डिजिटल तकनीक और विज्ञान के नए युग में प्रवेश कर रही है तब शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी केवल ज्ञान देना नहीं बल्कि नैतिकता संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को भी आगे बढ़ाना है। उनके अनुसार शिक्षा ही एक न्यायपूर्ण समावेशी और प्रगतिशील समाज की सबसे मजबूत आधारशिला है।
