यह कदम उस समय सामने आया है, जब कई प्रमुख टीवी चैनलों के पत्रकारों की व्हाइट हाउस में प्रवेश संबंधी अनुमति को लेकर विवाद अदालत तक पहुंच गया। संबंधित मीडिया संस्थानों ने संयुक्त रूप से प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। उनका कहना है कि केवल खबरों की सामग्री पसंद नहीं आने के आधार पर पत्रकारों की पहुंच रोकना संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर सवाल है।
विवाद की शुरुआत पत्रकारों के प्रवेश बैज निष्क्रिय किए जाने के बाद हुई। इसके बाद संबंधित संस्थानों के संवाददाताओं को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश से रोक दिया गया। मीडिया संस्थानों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना उचित सूचना और प्रक्रिया के उनके पत्रकारों की पहुंच सीमित की।
मीडिया संस्थानों की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रपति या किसी सरकारी अधिकारी को केवल खबरों की सामग्री से असहमति के कारण प्रेस के संवैधानिक अधिकारों और स्वतंत्रता से जुड़े हितों को खत्म करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने पत्रकारों की व्हाइट हाउस तक पहुंच से जुड़े प्रतिबंधों को चुनौती दी है।
इसी बीच प्रमुख टीवी नेटवर्कों के बीच राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की साझा कवरेज को लेकर भी बदलाव देखने को मिला। सोमवार को सीएनएन को उस प्रेस पूल व्यवस्था से हटा दिया गया, जिसके तहत प्रमुख समाचार नेटवर्क व्हाइट हाउस की महत्वपूर्ण गतिविधियों की कवरेज आपस में साझा करते हैं।
विवाद के बीच व्हाइट हाउस ने अपना 24 घंटे चलने वाला टीवी प्लेटफॉर्म शुरू किया। इसका उद्देश्य प्रशासन की महत्वपूर्ण सूचनाओं, घोषणाओं और फैसलों को सीधे दर्शकों तक पहुंचाना बताया गया है। इस सेवा पर राष्ट्रपति ट्रंप के भाषण और प्रशासन से संबंधित वीडियो सामग्री दिखाई जाएगी।
व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया कि इस माध्यम से ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियां और घोषणाएं लोगों तक पहुंचेंगी, जो पहले उनकी नजर से छूट जाती थीं। सेवा को प्रशासन की गतिविधियों और राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की जानकारी सीधे उपलब्ध कराने वाले मंच के रूप में पेश किया गया है।
दूसरी ओर, प्रतिबंधित मीडिया संस्थानों का कहना है कि सरकारी परिसर में पत्रकारों की पहुंच को केवल खबरों की सामग्री के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता। उनका तर्क है कि प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक अधिकारों की रक्षा जरूरी है और किसी भी प्रतिबंध के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि व्हाइट हाउस स्वतंत्र प्रेस को निशाना नहीं बना रहा, बल्कि उनके अनुसार गलत खबरों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने ऐसी खबरों को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया और कहा कि इसे रोका जाना चाहिए।
व्हाइट हाउस का तर्क है कि संविधान में मीडिया के अधिकारों का सम्मान किया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर मीडिया संस्थान को व्हाइट हाउस, ब्रीफिंग रूम या राष्ट्रपति के प्रेस पूल तक स्वतः पहुंच का अधिकार मिल जाता है।
अब इस पूरे विवाद में अदालत की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। एक तरफ मीडिया संस्थान पत्रकारों की पहुंच और प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों का सवाल उठा रहे हैं, वहीं प्रशासन अपने फैसले को उचित बता रहा है। इसी बीच ‘ट्रंप टीवी’ की शुरुआत ने व्हाइट हाउस और अमेरिकी मीडिया के बीच चल रहे विवाद को एक नया रूप दे दिया है।
