यह किस्सा उस समय का है, जब राजामौली अपनी फिल्म ‘ईगा’ को हिंदी दर्शकों तक ‘मक्खी’ नाम से पहुंचाने की तैयारी कर रहे थे। फिल्म के प्रचार के सिलसिले में वह कई लोगों से मुलाकात कर रहे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात शाहरुख खान से हुई। शाहरुख उनकी पिछली फिल्म ‘मगधीरा’ देख चुके थे और उन्होंने राजामौली से उनके काम तथा नई फिल्म के बारे में बातचीत की।
राजामौली ने बताया था कि शाहरुख ने उनसे पूछा कि वह उस समय क्या कर रहे हैं। जब उन्होंने बताया कि वह ‘मक्खी’ के प्रचार में व्यस्त हैं, तो शाहरुख ने बिना किसी आग्रह के फिल्म के बारे में लोगों को बताने का फैसला किया। उन्होंने खुद फिल्म को लेकर संदेश साझा किया और दर्शकों से इसे देखने की अपील की।
शाहरुख ने ‘मक्खी’ को राजामौली की बनाई एक मौलिक फिल्म बताते हुए उसकी रिलीज की जानकारी दी थी। उन्होंने दर्शकों को परिवार और बच्चों के साथ फिल्म देखने के लिए प्रोत्साहित किया था। साथ ही उन्होंने राजामौली और उनकी पूरी टीम को शुभकामनाएं भी दी थीं।
राजामौली के लिए यह पहल इसलिए खास थी क्योंकि उस समय वह हिंदी फिल्म दर्शकों के बीच बहुत बड़ा नाम नहीं थे। ऐसे दौर में एक बड़े सितारे का उनकी फिल्म के बारे में खुद आगे आकर बात करना उनके लिए निश्चित तौर पर यादगार अनुभव बना। राजामौली ने इस घटना को शाहरुख के सहज और सहयोगी स्वभाव से जोड़कर याद किया था।
इस घटना के बाद राजामौली ने शाहरुख के प्रति अपना आभार भी जाहिर किया था। उन्होंने कहा था कि किसी ऐसे व्यक्ति की मदद करना, जिसे उस समय हिंदी दर्शक बहुत ज्यादा नहीं जानते थे, शाहरुख के व्यक्तित्व की खासियत को दिखाता है। राजामौली के मन में इस घटना की याद लंबे समय तक बनी रही।
राजामौली ने शाहरुख के साथ काम करने की इच्छा को लेकर भी सम्मान जाहिर किया था। उनका मानना था कि देश का कोई भी निर्देशक उनके साथ काम करना चाहेगा। उनके लिए शाहरुख केवल एक बड़े अभिनेता नहीं, बल्कि ऐसा व्यक्ति भी हैं जो दूसरे कलाकारों और फिल्मकारों के काम को पहचानने तथा प्रोत्साहित करने की क्षमता रखते हैं।
राजामौली के करियर में इसके बाद कई बड़े पड़ाव आए और उनकी फिल्मों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। फिलहाल वह अपनी आगामी फिल्म ‘वाराणसी’ को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म में महेश बाबू मुख्य भूमिका में नजर आएंगे, जबकि प्रियंका फीमेल लीड भूमिका निभा रही हैं।
राजामौली और शाहरुख से जुड़ा यह पुराना किस्सा बताता है कि किसी कलाकार के करियर के शुरुआती दौर में मिला छोटा सा प्रोत्साहन भी उसके लिए लंबे समय तक यादगार रह सकता है। शाहरुख की वह पहल राजामौली के लिए ऐसी ही एक खास याद बन गई, जिसे वह आज भी सम्मान के साथ याद करते हैं।
