प्रदर्शन उस समय चर्चा का विषय बन गया जब संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान कथित तौर पर आंसू गैस और अन्य भीड़ नियंत्रण उपायों का इस्तेमाल किए जाने की खबरें सामने आईं। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस घटनाक्रम पर अपनी राय व्यक्त की। फिल्म जगत से जुड़े कलाकारों ने भी छात्रों के पक्ष में संवेदनशीलता और संवाद की जरूरत पर बल देते हुए अपनी प्रतिक्रियाएं साझा कीं।
अभिनेत्री पूजा भट्ट ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि जब छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग की घटनाएं सामने आती हैं तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि विरोध की आवाज को दबाने के बजाय उसकी बात सुनना अधिक जरूरी है। उनका मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति को सम्मानपूर्वक सुना जाना चाहिए और समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से तलाशा जाना चाहिए।
अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर संक्षिप्त लेकिन भावनात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए लिखा कि इस दिन ने केवल लोगों को शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि पूरे देश को भावनात्मक रूप से भी प्रभावित किया है। उनकी यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की गई और कई लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया भी दी।
अदिति राव हैदरी ने इस विषय पर विस्तृत संदेश साझा करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन सबसे पहले इंसानियत और संवेदनशीलता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों और अपनी बात रखने वाले प्रत्येक नागरिक के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और गरिमापूर्ण वातावरण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। उनके अनुसार संवाद और एक-दूसरे की बात सुनना ही किसी भी लोकतांत्रिक समाज की वास्तविक ताकत है तथा देश के युवाओं को सकारात्मक माहौल उपलब्ध कराना भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
जेनेलिया देशमुख ने भी छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखते हुए कहा कि देश के युवाओं की आवाज बिना किसी भय के सुनी जानी चाहिए। उन्होंने युवाओं को लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए कहा कि उनके विचार, ऊर्जा और सपने ही देश के भविष्य की दिशा तय करते हैं। उन्होंने समाज से अपील की कि युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए और उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए।
यह पूरा विरोध प्रदर्शन मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। इसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे रहे, जिन्हें बाद में चिकित्सकीय देखरेख के लिए अस्पताल ले जाया गया। इस घटनाक्रम के बाद छात्रों के आंदोलन, परीक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक विरोध के तरीकों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है, जबकि विभिन्न वर्गों की ओर से संवाद और शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता लगातार रेखांकित की जा रही है।
