एनएसई के आईपीओ के ग्रे मार्केट प्रीमियम में पिछले कुछ दिनों के दौरान लगातार कमजोरी देखने को मिली है। 11 सितंबर को प्राइस बैंड की घोषणा के बाद जीएमपी करीब 218 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर था। इसके बाद इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई। 17 सितंबर को जब आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था, तब ग्रे मार्केट प्रीमियम 142 रुपये प्रति शेयर या करीब 7.96 प्रतिशत था।
अब अंतिम दिन तक जीएमपी घटकर 59 रुपये रह गया है। हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम को आधिकारिक बाजार संकेतक नहीं माना जाता है। यह आईपीओ के इश्यू प्राइस से ऊपर अनौपचारिक बाजार में मिलने वाले प्रीमियम को दर्शाता है। इसलिए जीएमपी का मौजूदा स्तर शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत की गारंटी नहीं देता।
एनएसई ने आईपीओ के लिए 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर इश्यू का आकार 22,561.57 करोड़ रुपये है। इस आईपीओ में कुल 12.64 करोड़ शेयर पेश किए जा रहे हैं।
यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस है। इसका मतलब है कि शेयरों की बिक्री से जुटाई जाने वाली रकम कंपनी के पास नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा निवेशकों को प्राप्त होगी। ऐसे में आईपीओ के जरिए कंपनी के कारोबार में सीधे नई पूंजी का प्रवेश नहीं होगा।
निवेशकों के बीच एनएसई के वित्तीय प्रदर्शन को लेकर भी चर्चा है। वित्त वर्ष 2026 में ऑपरेशन से कंपनी की आय 16,601.31 करोड़ रुपये रही। यह वित्त वर्ष 2025 में दर्ज 17,140.67 करोड़ रुपये की आय से कम है। इस तरह सालाना आधार पर ऑपरेशन से आय में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।
कंपनी की आय के प्रमुख स्रोतों में शामिल ट्रांजैक्शन चार्जेज में भी कमी आई है। समीक्षा अवधि के दौरान ट्रांजैक्शन चार्जेज से प्राप्त आय 13,635.76 करोड़ रुपये से घटकर 13,057.01 करोड़ रुपये रह गई। यह सालाना आधार पर करीब चार प्रतिशत की गिरावट है।
आईपीओ के अंतिम दिन जीएमपी में आई कमी और कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में दर्ज गिरावट निवेशकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। इश्यू की अंतिम स्थिति और आगे शेयर की बाजार में लिस्टिंग का प्रदर्शन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
