उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार दाखिल किए गए कुल आयकर रिटर्न में से करीब 4.40 करोड़ रिटर्न का सत्यापन पूरा हो चुका है। इसके अलावा लगभग 2.34 करोड़ रिटर्न का प्रोसेसिंग कार्य भी पूरा किया जा चुका है। इससे संकेत मिलता है कि रिटर्न दाखिल करने के साथ-साथ विभाग उसकी जांच और निस्तारण की प्रक्रिया भी तेज गति से आगे बढ़ा रहा है, जिससे पात्र करदाताओं को समय पर आवश्यक लाभ मिल सके।
आयकर विभाग ने करदाताओं से अपील की है कि वे अंतिम दिन का इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द अपना आयकर रिटर्न दाखिल करें। विभाग ने विशेष रूप से आईटीआर-1 और आईटीआर-2 फॉर्म भरने वाले करदाताओं को समय रहते प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि अंतिम समय में पोर्टल पर अधिक ट्रैफिक या दस्तावेजों में किसी त्रुटि के कारण अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए पहले से तैयारी करना अधिक उचित रहेगा।
रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों का मिलान करना भी बेहद जरूरी माना गया है। करदाताओं को फॉर्म 16, वार्षिक सूचना विवरण, फॉर्म 26एएस, बैंक स्टेटमेंट और आय से जुड़े अन्य रिकॉर्ड की सावधानीपूर्वक जांच करने की सलाह दी गई है। यदि इन दस्तावेजों और रिटर्न में दर्ज जानकारी के बीच कोई अंतर रह जाता है, तो भविष्य में सत्यापन या प्रोसेसिंग के दौरान परेशानी उत्पन्न हो सकती है। सही और पूर्ण जानकारी देने से रिटर्न का निस्तारण भी अपेक्षाकृत तेजी से होता है।
31 जुलाई की अंतिम तिथि उन करदाताओं पर लागू होती है जिन्हें अपने खातों का टैक्स ऑडिट कराने की आवश्यकता नहीं होती। इसमें वेतनभोगी कर्मचारी, पेंशनभोगी, छात्र तथा अन्य सामान्य व्यक्तिगत करदाता शामिल हैं। ऐसे करदाताओं के लिए निर्धारित समयसीमा के भीतर रिटर्न दाखिल करना आवश्यक है, ताकि विलंब से जुड़ी संभावित जटिलताओं और नियमों के प्रभाव से बचा जा सके।
आईटीआर-1, जिसे सहज फॉर्म भी कहा जाता है, उन व्यक्तिगत करदाताओं के लिए निर्धारित है जिनकी आय वेतन या पेंशन, एक आवासीय मकान और अन्य साधारण स्रोतों जैसे ब्याज से प्राप्त होती है तथा जिनकी कुल वार्षिक आय निर्धारित सीमा के भीतर रहती है। दूसरी ओर आईटीआर-2 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों के लिए है जिनकी व्यवसाय या पेशे से आय नहीं होती, लेकिन उन्हें पूंजीगत लाभ, एक से अधिक मकानों, विदेशी संपत्तियों, विदेशी आय या अन्य अपेक्षाकृत जटिल स्रोतों से आय प्राप्त होती है। ऐसे करदाताओं को अपनी आय की प्रकृति के अनुसार सही फॉर्म का चयन कर समयसीमा के भीतर रिटर्न दाखिल करने की सलाह दी गई है।
