बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एशियाई बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो सेंसेक्स और निफ्टी में शुरुआती बढ़त देखने को मिल सकती है। वहीं यदि वैश्विक स्तर पर किसी तरह की अनिश्चितता या मुनाफावसूली का दबाव बढ़ता है तो बाजार में उतार चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचने की सलाह दी जा रही है।
इस समय आईटी बैंकिंग ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर निवेशकों की विशेष नजर बनी हुई है। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के तिमाही नतीजों का सीजन शुरू होने वाला है इसलिए इस सेक्टर में गतिविधियां बढ़ सकती हैं। बैंकिंग शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिल सकती है यदि आर्थिक संकेतक सकारात्मक बने रहते हैं। ऑटो सेक्टर में मासिक बिक्री के आंकड़ों के आधार पर चुनिंदा शेयरों में हलचल संभव है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी आज बाजार की दिशा तय करेंगी। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार पूंजी निवेश जारी रहता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। दूसरी ओर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों या भू राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण बिकवाली बढ़ने पर बाजार दबाव में आ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों पर भी निवेशकों की पैनी नजर रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो इसका सकारात्मक असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों पर देखने को मिल सकता है। वहीं रुपये की मजबूती या कमजोरी भी आयात निर्यात से जुड़ी कंपनियों के शेयरों को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में बाजार में चुनिंदा शेयरों पर आधारित कारोबार देखने को मिल सकता है। मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों में निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है जबकि केवल अफवाहों या तेजी से बढ़ते शेयरों के पीछे भागने से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छी कंपनियों में चरणबद्ध निवेश अब भी बेहतर विकल्प माना जा रहा है।
कुल मिलाकर आज शेयर बाजार में कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है लेकिन मजबूत आर्थिक संकेत और निवेशकों का भरोसा बाजार को सहारा दे सकते हैं। निवेशकों को सलाह है कि किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य लें और बाजार की चाल को ध्यान में रखते हुए संतुलित रणनीति अपनाएं।
