अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 4,340 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। दिन के दौरान इसमें लगभग 0.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले पिछले सप्ताह सोने की कीमत में कुल 1.8 प्रतिशत की कमजोरी आई थी। चांदी भी करीब 0.8 प्रतिशत गिरकर 64 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। प्लैटिनम और पैलेडियम की कीमतों में भी नरमी देखी गई।
घरेलू बाजार में सोमवार को गणेश चतुर्थी के अवसर पर एमसीएक्स के सोना और चांदी वायदा कारोबार का सुबह का सत्र बंद रहा। एमसीएक्स पर कारोबार शाम 5 बजे से रात 11:30 बजे तक होने की जानकारी दी गई है। अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना वायदा करीब 1,52,655 रुपये प्रति 10 ग्राम और सितंबर डिलीवरी वाली चांदी करीब 2,34,886 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर रही।
अमेरिका में शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य और ऊर्जा की कीमतों को हटाकर मापी जाने वाली कोर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई अगस्त में मासिक आधार पर 0.3 प्रतिशत बढ़ी। यह बाजार की उम्मीदों से अधिक रही। आंकड़ों से संकेत मिला कि महंगाई पर अभी पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका है।
महंगाई के इन आंकड़ों के बाद बाजार में फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना मजबूत हुई है। कारोबारी सितंबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की करीब 88 प्रतिशत संभावना देख रहे हैं। ऊंची ब्याज दरें आम तौर पर सोने जैसी ऐसी परिसंपत्तियों के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं, जिनसे ब्याज आय नहीं होती।
इस बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री आपूर्ति मार्गों पर जोखिम के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल देखा गया है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। तेल आपूर्ति से जुड़े जोखिमों ने ऊर्जा महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।
यमन में हौथी बलों के महत्वपूर्ण बंदरगाहों पर कब्जे की बात भी सामने आई है। ये बंदरगाह उस महत्वपूर्ण तटीय क्षेत्र के पास हैं, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार के एक बड़े हिस्से से जुड़ा है। रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में ड्रोन हमलों और एक व्यापारिक पोत पर हमले के बाद सऊदी अरब ने अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई और तीन लोग घायल हुए।
विश्लेषकों के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें वैश्विक महंगाई को बढ़ा सकती हैं। इससे केंद्रीय बैंकों पर सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने का दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से निवेशकों ने फिलहाल सोने और चांदी में नई खरीदारी से दूरी बनाई है।
अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति बैठक और ब्याज दर संबंधी फैसले पर है। यदि फेड दरें बढ़ाता है और आगे भी सख्त रुख के संकेत देता है, तो कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर कुछ समर्थन दे सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा फेड के फैसले तथा कच्चे तेल की कीमतों से प्रभावित होने की संभावना है।
